38 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अनुच्छेद 188, 277-अ, 278 और 278-अ
* माननीय सभापति : तब हम अनुच्छेद 277 पर आते हैं।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं अनुच्छेद 277 को इस समय रोक कर रखना पसन्द करूंगा।
माननीय सभापति : तब क्या हम अनुच्छेद 277-अ लें? अनुच्छेद 277 इस समय रोक कर रखा गया है और हम अनुच्छेद 277-अ लेते हैं।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : महोदय, मैं सोचता हूँ यह अच्छा होगा यदि तीनों संशोधन एक साथ ही लिए जायें, उदाहरणार्थ अनुच्छेद 188 को छोड़ने के लिए संशोधन, नये अनुच्छेद 277-अ को सन्निविष्ट कराना और पुराने अनुच्छेद 278 को दो नये अनुच्छेदों 278 और 278-अ द्वारा प्रतिस्थापित करना क्योंकि वे सजातीय मामले हैं। मतदान के उद्देश्य के लिए उन्हें अलग-अलग रखा जा सकता है। लेकिन चर्चा के लिए, मैं सोचता हूँ कि उन्हें साथ-साथ लिया जा सकता है।
माननीय सभापति : अनुच्छेद 188, 278 और 278-अ साथ-साथ लिए जा सकते हैं क्योंकि वे सजातीय मामलों से संबंध रखते हैं और यह अच्छा होगा यदि सभी अनुच्छेदों पर चर्चा एक साथ हो जाय, यद्यपि हम उन पर मतदान अलग-अलग करा सकते हैं।
“कि अनुच्छेद 188 को मिटा दिया जाय।“
महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ :
“कि अनुच्छेद 277 के बाद, अधोलिखित नया अनुच्छेद सन्निविष्ट किया जायः
’277-अ प्रत्येक राज्य को बाहरी आक्रमण तथा आंतरिक अशांति के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करने का तथा प्रत्येक राज्य की सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार चल रही है यह सुनिश्चित करना संघ का कर्त्तव्य होगा।’“
राज्य को बाहरी आक्रमण
तथा आंतरिक अशांति से
बचाने के लिए संघ का
कर्त्तव्य।
और तब, महोदय, मैं सूची II की संशोधन संख्या 160 का प्रस्ताव करता हूँ, जो इस प्रकार है : “कि अनुच्छेद 278 के लिए, अधोलिखित अनुच्छेदों को प्रतिस्थापित किया जाए :
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 3 अगस्त, 1949, पृ. 130-35