40 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
(4) इस प्रकार अनुमोदित कोई घोषणा, जब तक रद्द नहीं की जाती, उस तारीख से छह महीने की अवधि की समाप्ति पर निष्प्रभावी हो जाएगी जब इस अनुच्छेद की धारा (3) के तहत उस घोषणा को अनुमोदित करने के लिए दूसरा प्रस्ताव पिरत हुआ थाः
बशर्ते कि यदि और इस प्रकार प्रायः ऐसी घोषणा प्रभाव में निरंतरता को अनुमोदित करते हुए प्रस्ताव के रूप में संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित हो जाती है तो वह घोषणा, जब तक रद्द नहीं की जाती, उस तारीख से और छह महीने की अवधि तक प्रभावी रहेगी जिस तारीख को इस धारा के तहत वह अन्यथा निष्प्रभावी हो गयी होती, लेकिन ऐसी कोई भी घोषणा किसी भी सूरत में तीन साल से अधिक अवधि के लिए प्रभावी नहीं रहेगीः
बशर्ते आगे कि यदि लोकसभा छह महीने की किसी ऐसी अवधि के दौरान भंग होती है और ऐसी घोषणा के लागू बने रहने की निरंतरता को अनुमोदित करते हुए लोकसभा द्वारा उक्त अवधि के दौरान प्रस्ताव पारित नहीं किया गया है, तो वह घोषणा उस तारीख के तीस दिन की समाप्ति पर निष्प्रभावी हो जायेगी जब लोकसभा पुनर्गठन के बाद पहली बार बैठती है जब तक कि उस अवधि की समाप्ति से पहले उस घोषणा का अनुमोदन करते हुए संसद के दोनों सदनों द्वारा प्रस्ताव पारित नहीं कर दिये जाते हैं।“
“278-अ. (1) जहाँ इस संविधान के अनुच्छेद 278 की धारा (1) के तहत जारी की गयी एक घोषणा द्वारा यह घोषित किया गया है कि राज्य की विधानपालिका की शक्तियां संसद या उसके तहत सत्ता के द्वारा प्रयोज्य होंगी, तो वह योग्य होगी -
(अ) संसद द्वारा राज्य के लिए कानून बनाने के अधिकार को राष्ट्रपति या उसके द्वारा विशेष रूप से उल्लिखित किसी अन्य प्राधिकरण को उसके पक्ष में सौंपने के लिए;
(ब) संसद द्वारा अथवा राष्ट्रपति अथवा किसी प्राधिकरण जिसको कानून बनाने का अधिकार इस धारा के उपखण्ड (अ) में सौंपा गया है के लिए भारत सरकार अथवा अधिकारियों और भारत सरकार के प्राधिकरणों पर अधिकार प्रदत्त करते हुए और कर्त्तव्य निर्धारित करते हुए या इनके लिए अधिकृत करते हुए कानून बनाने हेतु;
(स) राष्ट्रपति को जब लोकसभा का सत्र चालू नहीं है राज्य के समेकित कोष से व्यय अधिकृत करने हेतु इस प्रकार के व्यय की संसद द्वारा स्वीकृति लम्बित करते हुए;
(द) इस संविधान के अनुच्छेद 102 के तहत राष्ट्रपति के लिए अध्यादेश जारी करने हेतु सिवाय जब संसद के दोनों सदनों का सत्र चालू है।