42 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
मामले को राष्ट्रपति को बता देना चाहिए कि उसने घोषणा जारी कर दी है और प्रशासन को अपने हाथों में ले लिया है और राज्यपाल द्वारा मूल अनुच्छेद 188 के तहत बनाये गये प्रतिवेदन पर राष्ट्रपति अनुच्छेद 278 के तहत कार्यवाही कर सकता है। यह मूल योजना थी।
अब महसूस किया जाता है कि कोई उपयोगी उद्देश्य पूरा नहीं होता यदि वहाँ वास्तविक आपातकाल है जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्रपति को राज्यपाल को प्रथम दृष्टि में संविधान को केवल एक पखवाड़े के लिए निलंबित रखने के अधिकार की अनुमति प्रदान करते हुए कार्यवाही करनी है। यदि राष्ट्रपति को अंततः संविधान में निहित संविधान को बनाये रखने के लिए प्रांतीय क्षेत्र में प्रवेश करने की जिम्मेदारी लेनी है तब यह अधिक अच्छा है कि राष्ट्रपति को इस क्षेत्र में बिल्कुल आरंभ में आ जाना चाहिए। इस आधार पर कि यह इस परिस्थिति के लिए उचित दृष्टिकोण है, उदाहरणार्थ कि यदि उत्तरदायित्व राष्ट्रपति का है तो राष्ट्रपति को बहुत पहले से क्षेत्र में आ जाना चिहए, यह स्पष्ट है कि अनुच्छेद 188 निरर्थक है और इसकी कोई आवश्यकता नहीं है। यही कारण है जिसके लिए मैंने प्रस्ताव किया है कि अनुच्छेद 188 को हटा दिया जाय।
अब मैं अनुच्छेद 277अ पर आता हूँ। कुछ लोग यह सोच सकते हैं कि अनुच्छेद 277अ केवल पुण्य घोषणा है कि उसे वहाँ नहीं होना चाहिए। प्रारूपण समिति का भिन्न विचार है इसलिए मैं व्याख्या करना चाहूँगा कि ऐसा क्यां है कि प्रारूपण समिति महसूस करती है कि अनुच्छेद 277अ होना चाहिए। मैं सोचता हूँ कि इस पर सहमति है कि हमारा संविधान, संविधान में ऐसे प्रावधानों के होने के बावजूद भी जिनके आधार पर केन्द्र को राज्यों की अवहेलना करने का अधिकार दिया गया है, तथापि यह एक संघीय संविधान है और जब हम कहते हैं कि हमारा संविधान एक संघीय संविधान है तो इसका यह अर्थ है कि राज्यों को दिये गये क्षेत्रों में राज्य उतने ही सम्प्रभु हैं जितना कि केन्द्र को मिले क्षेत्र में केन्द्र सम्प्रभु है। दूसरे शब्दों में, ऐसे प्रावधानों को छोड़कर जो केन्द्र को राज्य के द्वारा पारित किए गये कानूनों की अवहेलना करने की अनुमति प्रदान करते हैं राज्यों को उस राज्य की शांति के लिए व्यवस्था के लिए तथा अच्छी सरकार के लिए कोई भी कानून बनाने का पूर्ण अधिकार है। अब, जबकि एक बार संविधान राज्यों को सम्प्रभु बना देता है और उन्हें उस राज्य की शांति के लिए व्यवस्था के लिए और अच्छी सरकार के लिए कानून बनाने हेतु पूर्ण अधिकार देता है, वास्तव में, केन्द्र का या किसी भी सत्ताधारी का हस्तक्षेप बाधित माना जायेगा क्योंकि वह राज्य की संप्रभु सत्ता का अतिक्रमण होगा। यह एक मूल प्रतिज्ञप्ति है जिसे मैं समझता हूँ हमें इस सच्चाई की वजह से अवश्य स्वीकार करना चाहिए कि हमारा संविधान संघीय है। ऐसा होने पर, यदि केन्द्र प्रांतीय