43
मामलों के प्रशासन में हस्तक्षेप करता है जैसा कि हमने केन्द्र को अनुच्छेद 278 के द्वारा प्राधिकृत करने का प्रस्ताव किया है, यह किसी कर्त्तव्य के तहत या इसके द्वारा जरूर होना चाहिए, जो कि संविधान केन्द्र पर आरोपित करता है। अतिक्रमण एक ऐसा अतिक्रमण नहीं होना चाहिए जो कि अकारण, मनमाना तथा कानून द्वारा अप्राधिकृत है। इसलिए यह बिल्कुल स्पष्ट करने के लिए कि अनुच्छेद 278 तथा 278-अ केन्द्र द्वारा राज्य की सत्ता का अकारण अतिक्रमण न माने जायें, हम अनुच्छेद 277-अ को सन्निविष्ट करने का प्रस्ताव करते हैं। जैसा कि सदस्य देखेंगे, अनुच्छेद 277-अ कहता है कि प्रत्येक इकाई की सुरक्षा करना तथा संविधान को बनाये रखना संघ का कर्त्तव्य होगा। जहाँ तक इस प्रकार के कर्त्तव्य का संबंध है यह पाया जायेगा कि केवल हमारा संविधान ही ऐसा नहीं है जो कि इस कर्त्तव्य की व्यवस्था करने जा रहा है। ऐसी ही धारायें अमेरिका के संविधान में भी हैं व आस्ट्रेलिया के संविधान में भी हैं, जहाँ कि संविधान, अभिव्यक्ति के शब्दों में, यह व्यवस्था करता है कि राज्यों या इकाईयों को बाहरी आक्रमण तथा आंतरिक अशांति से सुरक्षा प्रदान करना केन्द्र सरकार का कर्त्तव्य होगा। जो कुछ भी हम प्रस्ताव कर रहे हैं वह अमेरिकी तथा आस्ट्रेलियाई संविधान में व्यक्त किये गये सिद्धांत में एक और धारा जोड़ने का है, उदाहरणार्थ, कि राज्यों में कानून द्वारा लागू किये गये संविधान को बनाये रखना भी संघ का कर्त्तव्य होगा। इसमें नया कुछ भी नहीं है और जैसा मैंने तथ्यों को देखते हुए कहा कि हम राज्यों को पूर्ण अधिकारों से सम्पन्न कर रहे हैं और उन्हें अपने क्षेत्र के अन्दर सम्प्रभु बना रहे हैं, यह व्यवस्था करना आवश्यक है कि यदि केन्द्र द्वारा प्रांतीय क्षेत्र का कोई अतिक्रमण किया जाता है तो वह इस कर्त्तव्य के पालन के लिए होगा। यह कर्त्तव्य पूरा करने का कार्य होगा और इसे, जहाँ तक संविधान का संबंध है, अकारण, मनमाना, अप्राधिकृत कार्य नहीं माना जायेगा। यही कारण है जिसके लिए हमने अनुच्छेद 277-अ को सन्निविष्ट किया है।
अनुच्छेद 278 तथा 278अ के संबंध में यद्यपि ये अलग-अलग दो धारायें प्रतीत होती हैं, वे केवल मूल अनुच्छेद 278 के ही भाग हैं। अनुच्छेद 278 में कुछेक सात धारायें हैं। पहली चार धारायें नये अनुच्छेद 278 में सन्निहित हैं। धारा (4) से आगे अनुच्छेद 278-अ में रखी गयी हैं। यह विभाजन करने की वजह, कहने के लिए, है क्योंकि अन्यथा सम्पूर्ण अनुच्छेद 278 इतना विस्तृत हो जाता कि संभवतः सदस्यों को इसके विभिन्न प्रावधानों को समझ पाना कठिन होता। यह समझने के लिए, कहने के लिए, यह विभाजन किया गया है।
अनुच्छेद 278 के संबंध में, पहला परिवर्तन जो दिखाई देता है वह यह है कि राष्ट्रपति को राज्यपाल की रिपोर्ट पर या अन्यथा कार्रवाई करनी है। मूल अनुच्छेद 188