अनुच्छेद 188, 277-अ, 278 और 278-अ - Page 66

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में विभक्त कर दिया गया है और प्रथम अनुसमर्थन के पश्चात! उद्घोषणा छह मास तक जारी रह सकती है और फिर उसे पुनः संसद द्वारा अनुसमर्थित किया जाना होगा। संसद के अनुसमर्थन के बाद वह केवल छह मास तक ही जारी रहेगी। संसद द्वारा उसका पुनः अनुसमर्थन होगा क्योंकि संसद द्वारा अनुसमर्थित किए जाने के बाद छह मास की ही अवधि की उद्घोषणा अनुज्ञात है। उसे आगे जारी रखने के लिए आगे अनुसमर्थन आवश्यक है और हमने तीन वर्ष की आखिरी सीमा रखी है। तीन वर्ष के अंत में न तो संसद और न ही राष्ट्रपति, उस प्रांत में जिसमें यह उद्घोषणा प्रभावी है, विद्यमान वस्तु-स्थिति को जारी रख सकता है।

अब मैं अनुच्छेद 278-अ पर आता हूँ। इसका उपखंड (क) जो नया उपखंड है इसमें उपबंधित है कि संसद-राज्य की विधियां बनाने की शक्ति राष्ट्रपति को अथवा इस निमित्त उनके द्वारा विनिर्दिष्ट किसी अन्य प्राधिकारी को प्रत्यायोजित कर सकती है।

इस अनुच्छेद का उपखंड (ख) केवल एक पारिणामिक परिवर्तन है जो अनुच्छेद 278-अ के खंड (1) के उपखंड (क) के परिणामस्वरूप है। इसमें लिखा है कि किसी विधि, जो संसद द्वारा बनाई गई हो या इस निमित्त संसद द्वारा नियत किसी अभिकरण द्वारा बनाई गई हो, को प्रभावी रूप देने के लिए प्राधिकार या तो भारत सरकार के अधिकारियों को या प्रांतीय सरकारों के अधिकारियों को भी प्रदत्त किया जा सकेगा।

अनुच्छेद 278-अ के खंड (1) का उपखंड (ग) एक नया उपखंड है। इसमें बजट की मंजूरी के लिए उपबंध किया गया है। अनुच्छेद 278 के मूल प्रारूप में इस बारे में कोई उपबंध नहीं था कि ऐसे प्रांत का बजट कैसे तैयार किया जाए और मंजूर किया जाए जिसका विधानमंडल निलम्बित किया जा चुका है। अनुच्छेद 278-अ में खंड (1) का उपखंड (ग) समाविष्ट करने से अब स्थिति स्पष्ट हो गई है। इसमें स्पष्ट रूप में लिखा है कि जब लोकसभा का सत्र चालू न हो, राष्ट्रपति राज्य की संचित निधि में से व्यय, संसद द्वारा ऐसे व्यय की मंजूरी के लंबित रहने तक प्राधिकृत कर सकेगा।

उपखंड (घ) द्वारा इसे बहुत स्पष्ट कर दिया गया है जो संभवतः इस अनुच्छेद में पहले से विवक्षित था, कि राष्ट्रपति भी किसी विशिष्ट प्रांत का प्रशासन चलाने के लिए, जिसका प्रबंध ग्रहण कर लिया गया है जब कि दोनों सदन सत्र में नहीं हैं अध्यादेश जारी करने के लिए अनुच्छेद 102 द्वारा प्रदत्त की गई अपनी शक्तियों का प्रयोग कर सकता है। मूल अनुच्देद 102 उन अध्यादेशों के विषय में था जो केंद्रीय सरकार के विषय में जारी किए जाने होते थे। अब हम उपखंड (घ) द्वारा यह स्पष्ट करते हैं कि राष्ट्रपति इस शक्ति का प्रयोग किसी भी अध्यादेश के बारे में करेगा जो उसके नियंत्रणाधीन लिए गए प्रांत के प्रशासन के संचालन के लिए पारित किया जाना आवश्यक हो।