अनुच्छेद 188, 277-अ, 278 और 278-अ - Page 69

48 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

प्रवर्तनशील खंड बिल्कुल भिन्न हैं। उदाहरण के लिए, जब अनुच्छेद 275 के अधीन युद्ध की उद्घोषणा की जा चुकी हो तो आपको प्रांतीय संविधान को निलम्बित करने का कोई प्राधिकार नहीं है। प्रांतीय संविधान प्रवर्तनशील रहेगा। विधानमंडल काम करता रहेगा और उसके पास वे शक्तियां रहेंगी जो संविधान द्वारा उसे दी गई हैं; कार्यपालिका अपनी कार्यपालक शक्तियां धारित किए रहेगी और प्रांत के कानून के अनुसार प्रांत का प्रशासन चलाती रहेगी। अनुच्छेद 276 के अधीन यह होता है कि केन्द्र को भी विधायन और प्रशासन की समवर्ती शक्ति मिल जाती है। अनुच्छेद 276 के अधीन यह सब होता है। लेकिन जब अनुच्छेद 278 प्रवर्तित होता है तो स्थिति बिल्कुल भिन्न हो जाएगी। तब प्रांत में कोई विधानमंडल नहीं होगा, क्योंकि विधानमंडल को निलम्बित कर दिया गया होगा। प्रांत में व्यावहारिक दृष्टि से कोई कार्यपालक प्राधिकारी नहीं होगा जब तक कि राष्ट्रपति द्वारा या संसद द्वारा या राज्यपाल द्वारा, उद्घोषणा द्वारा, कोई शक्ति छोड़ न दी गई हो। ये दो स्थितियां नितांत भिन्न हैं। मेरे विचार में, यह अनिवार्य है कि हमें वह सीमांकन करना चाहिए जो हमने अनुच्छेद 275 और अनुच्छेद 278 के संघटक शब्दों से बनाया है। मेरे विचारों में दो चीजों के मिश्रण से विकट दुविधा पैदा हो जाएगी।

पंडित हृदयनाथ कुंजरू (संयुक्त प्रांत : साधारण) : क्या मेरे माननीय मित्र एक

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बिंदु को स्पष्ट करने का कष्ट करेंगे? क्या अनुच्छेद 278 और अनुच्छेद 278-अ का प्रयोजन केन्द्र सरकार को, प्रांतों के सुशासन की खातिर प्रांतीय मामलों में दखल देने में समर्थ बनाना है?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : नहीं, नहीं। केन्द्र को वह प्राधिकार नहीं

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दिया गया है।

पंडित हृदयनाथ कुंजरू : अथवा केवल तभी, जब प्रांत में ऐसा कुशासन हो जिससे लोक शांति संकट में पड़ सकती है?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : तभी जब प्रांतों के संविधान शासन के लिए

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सरकार निर्धारित उपबंधों के अनुरूप न चलें। प्रांत में सुशासन है अथवा नहीं यह तय करना केन्द्र का काम है। मैं इस बिन्दु पर पूरी तरह स्पष्ट हूँ।

पंडित हृदयनाथ कुंजरू : समग्र रूप में संविधान के उपबंधों से समग्र रूप में यथार्थतः क्या अभिप्रेत है? सदन माननीय सदस्य से यह जानने के लिए हकदार है कि ‘‘संविधान के उपबंधों के अनुसार’’ वाक्यांश के अर्थ के बारे में उनका क्या विचार है।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : अब मुझे पूरी बात पर बारीकी से विचार करने

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में बहुत ज्यादा समय लगेगा और प्रत्येक अनुच्छेद के प्रति निर्देश करना अर्थात् यह