अनुच्छेद 188, 277-अ, 278 और 278-अ - Page 70

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बताना कि इसमें यह सिद्धांत स्थापित है और यह बताना कि यदि प्रांत की कोई सरकार या प्रांत का कोई विधानमंडल उसके अनुसार काम नहीं करता है तो वह मशीनरी (तंत्र) की असफलता कहा जाएगा। मशीनरी की असफलता अभिव्यक्ति का प्रयोग, मैं देखता हूँ, भारत सरकार अधिनियम, 1935 में किया गया है। इसलिए हर कोई उसके तथ्यतः और विधितः अर्थ से पूर्णतः परिचित होगा। मेरे विचार में, और अधिक व्याख्या की आवश्यकता नहीं है।

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मैंने पेश किए हैं उनके बारे में क्या कहना है? क्या डॉ. अम्बेडकर उनका जवाब नहीं दे रहे हैं?

मननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर : मैं उन्हें स्वीकार नहीं करता हूँ। मैं केवल उन संशोधनों का जवाब दे रहा हूँ या उल्लेख कर रहा हूँ जिनमें मेरे विचार में कोई सार है। मैं पेश किए गए हर संशोधन पर चर्चा नहीं कर सकता।

श्री एच.वी. कामथ : डॉ. अम्बेडकर केवल मौखिक रूप से प्रस्तावित किए गए संशोधनों का जवाब दे रहे हैं। क्या उन्हें प्रस्तावित किए गए सभी संशोधनों का जवाब नहीं देना चाहिए?

माननीय सभापति : मैं डॉ. अम्बेडकर को किसी खास तरीके से जवाब देने के लिए विवश नहीं कर सकता। उन्हें अपने तरीके से जवाब देने का हक है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर : जहाँ तक सदन में हुई विस्तृत बहस का संबंध है जिसमें सुझाव दिया गया है कि इन अनुच्छेदों का दुरूपयोग हो सकता है, मैं यह कहना चाहूँगा कि मैं सर्वथा इस बात से इंकार नहीं करता कि संभव है इन अनुच्छेदों का दुरूपयोग हो या इनका प्रयोग राजनीतिक प्रयोजनों के लिए हो। लेकिन यह आपत्ति तो संविधान के प्रत्येक भाग पर लागू होती है जो केन्द्र को प्रांतों पर अध्यारोही होने की शक्ति प्रदान करता है। वस्तुतः मैं अपने माननीय मित्र श्री गुप्ते द्वारा कल व्यक्त की गई भावनाओं की कद्र करता हूँ कि हमें उचित बात यह प्रत्याशित करनी चाहिए कि इन अनुच्छेदों को कभी प्रवर्तित नहीं किया जाएगा और वे निर्जीव अक्षर बने रहेंगे। यदि कभी उनका प्रवर्तन किया गया तो मुझे आशा है राष्ट्रपति, जिनके पास ये शक्तियां हैं, प्रांतों का प्रशासन वास्तव में निलम्बित करने से पूर्व उचित सावधानियां बरतेंगे। आशा है, वे सबसे पहला काम यह करेंगे कि वे गलती करने वाले प्रांत को केवल यह चेतावनी देंगे कि चीजें उस तरह नहीं हो रही हैं जैसी होनी संविधान के अनुसार आशायित हैं। यदि वह चेतावनी बेकार जाती है तो वे दूसरा काम यह करेंगे कि वे निर्वाचन आदेश देकर प्रांत के लोगों को अपना मामला स्वयं व्यवस्थित करने देंगे। जब ये दो उपचार भी बेकार हो जाएंगे तभी वे