अनुच्छेद 280 - Page 72

51

अनुच्छेद में केवल यह लिखा है कि शक्ति का प्रयोग राज्य द्वारा अर्थात् संसद एवं प्रांतों दोनों द्वारा किया जा सकता है चाहे अनुच्छेद 13 में कुछ भी कहा गया हो। प्रो. शिब्बनलाल सक्सेना : आपातकाल में?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : हाँ, क्योंकि अन्य मामलों में यह एक सामान्य शक्ति है। जब कोई आपात नहीं होता तब भी दोनों को विषय पर विधान बनाने की शक्ति होती है। इसलिए मुझे कोई कारण दिखाई नहीं पड़ता कि आपात के समय वह शक्ति क्यों छीनी जाए। दूसरी ओर, मुझे यह सोचना चाहिए था कि आपात उन कारणों में से एक था कि यह शक्ति राज्य को क्यों दी जाए।

अब, मेरे मित्र श्री कामथ की इस आलोचना के संबंध में कि अगला अनुच्छेद 280 इस प्रयोजन के लिए काफी है, मैं समझता हूँ यह पूरी स्थिति की भ्रामक धारणा है क्योंकि जब तक उपान्तरित करने की शक्ति नहीं दी जाएगी तब तक निलम्बन निरर्थक होगा। इसलिए अनुच्छेद 280 बिल्कुल पृथक विषय के बारे में है, इसका इस अनुच्छेद से कोई सरोकार नहीं है। इस अनुच्छेद को उसी रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए जिस रूप में यह प्रस्तावित है।

माननीय सभापति : मैं संशोधनों को मतदान के लिए रखता हूँ।

[ 3 संशोधन नकार दिए गए, अनुच्छेद 279 संविधान में जोड़ा गया। ]

अनुच्छेद 280

* माननीय सभापति : अब हम अनुच्छेद 280 को लेते हैं।

संशोधन संख्या 3028 - डॉ. अम्बेडकर !

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर : महोदय, मैं प्रस्तावित करता हूँ

“कि वर्तमान अनुच्छेद 280 के स्थान पर निम्नलिखित अनुच्छेद रखा जाए :

“280. जहाँ आपात की उद्घोषणा प्रवर्तन में है वहाँ राष्ट्रपति आदेश द्वारा घोषणा कर सकेगा कि संविधान के भाग 3 में प्रदत्त अधिकारों के प्रवर्तन के लिए किसी न्यायालय में जाने का अधिकार तथा इस प्रकार प्रदत्त किसी अधिकार के प्रवर्तन के लिए किसी न्यायालय में लम्बित सब कार्यवाहियां उस अवधि में जिसके दौरान उद्घोषणा प्रवर्तन में है अथवा इससे कम उतनी अवधि के लिए निलम्बित रहेंगी जितनी आदेश में विनिर्दिष्ट की गई हो।“

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 4 अगस्त, 1949, पृ. 186