अनुच्छेद 247 - Page 73

52 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

सदन देखेगा कि यह अनुच्छेद 280 वास्तव में मूल अनुच्छेद 280 में सुधार है। मूल अनुच्छेद 280 में उपबंध किया गया था कि अनुच्छेद 280 के प्रवर्तन को निलम्बित करने वाला राष्ट्रपति का आदेश उद्घोषणा के प्रवर्तन में न रहने के बाद 6 मास की अवधि तक प्रभावी रहना चाहिए। अभिप्राय यह है कि गारन्टी जैसे बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट आदि निलम्बित रहेंगी भले ही निलम्बन की आवश्यकता समाप्त हो चुकी हो। महसूस किया गया कि कोई कारण नहीं है कि गारन्टी का यह निलम्बन मामले की जरूरत के बाद क्यों चलता रहे। वस्तुतः स्थिति में इतना सुधार हो सकता है कि गारन्टियां प्रवर्तनशील हो सकती हैं भले ही उद्घोषणा प्रवर्तन में बनी हुई है। अतः यह अनुज्ञात करने की दृष्टि से कि निलम्बन आदेश उद्घोषणा काल के बाद जारी नहीं रहेगा और उस समय से काफी पहले उसका अन्त हो सकता है जब उद्घोषणा प्रवर्तन में नहीं रही है, यह नया प्रारूप इस संविधान सभा के समक्ष प्रस्तुत कर दिया गया है और मुझे आशा है, सभा को इसे स्वीकार करने में कोई कठिनाई नहीं होगी।

* * * *

* माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : क्या मैं कुछ बोल सकता हूँ? कार्यवाहियों का निलम्बन, राष्ट्रपति के आदेश द्वारा जिसका निःसंदेह अर्थ है कार्यपालिका की सलाह पर है, जिसका निःसंदेह यह भी अर्थ है कि कार्यपालिका को विधायिका का विश्वास हासिल है किया जाना चाहिए या नहीं, इस बारे में मुद्दे की दृष्टि से, इसमें बेशक मतभेद है कि क्या निलम्बन कार्यपालिका के कृत्य द्वारा किया जाना चाहिए अथवा संसद द्वारा निर्मित विधि द्वारा। अतः मेरी इच्छा है कि इस अनुच्छेद पर चर्चा रोक दी जाए। ताकि प्रारूपण समिति इस विषय पर विचार कर सके। अब हम दूसरे अनुच्छेदों को ले सकते हैं।

माननीय सभापति : इस अनुच्छेद पर चर्चा रोकी जाती है।

इसके बाद हम अनुच्छेद 247 पर चर्चा करेंगे।

अनुच्छेद 247

** माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : महोदय, मैं प्रस्तावित करता हूँ -

“कि अनुच्छेद 247 से आरंभ होने वाले अनुच्छेदों के शीर्षक के स्थान पर निम्नलिखित शीर्षक रखा जाए -

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 4 अगस्त, 1949, पृ. 198

** ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 4 अगस्त, 1949, पृ. 198-99