अनुच्छेद 248 - Page 74

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’साधारण’

* माननीय सभापति : मैं नहीं समझता कि इस विषय पर कोई चर्चा अपेक्षित है।

प्रश्न है :

कि अनुच्छेद 847 से प्रारंभ होने वाले अनुच्छेदों के शीर्षक के स्थान पर निम्नलिखित शीर्षक रखा जाए :-

प्रस्ताव अंगीकृत हुआ।

* * * *

माननीय सभापति : क्या कोई बोलना चाहेंगे?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं केवल यह कहना चाहता हूँ कि वे शब्द

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प्रचूर सावधानी के साथ शामिल किए गए हैं। हो सकता है वे अनावश्यक हों लेकिन हो सकता है वे आवश्यक समझे जाएं। हम उन शब्दों को रखना चाहते हैं।

अनुच्छेद 247 संविधान में जोड़ा गया।

* * * *
अनुच्छेद 248

** माननीय सभापति : अब हम अनुच्छेद 248 को लेते हैं।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : महोदय, मैं प्रस्तावित करता हूँ :

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“कि अनुच्छेद 248 के स्थान पर निम्नलिखित अनुच्छेद रखे जाएंः

“248. कोई कर, विधि के प्राधिकार के बिना उद्गृहीत या संगृहीत नहीं किया जाएगा।“

“248क. (1) कतिपय करों और शुल्कों के शुद्ध आगम

पूर्णतः या भागतः राज्यों को सौंप दिए जाने के संबंध में कर, विधि के प्राधिकार

इस अध्याय के उपबंधों के अधीन रहते हुए, भारत सरकार के बिना अधिरोपित न

द्वारा जुटाए गए या प्राप्त किए गए सभी राजस्व या लोक किए जाएं

धन राशियों की एक संचित निधि बनेगी जो ‘‘भारत की संचित निधि“ के नाम से ज्ञात होगी, तथा किसी राज्य सरकार द्वारा जुटाए गए या

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 4 अगस्त, 1949, पृ. 198

** सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 4 अगस्त, 1949, पृ. 1998-99