अनुच्छेद 249 - Page 75

54 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

प्राप्त किए गए सभी राजस्व या लोक धनराशियों की एक संचित निधि बनेगी जो “राज्य की संचित निधि“ के नाम से ज्ञात होगी।

(2) भारत की संचित निधि या राज्य की संचित निधि में से कोई भी धनराशि विधि के अनुसार तथा इस संविधान में उपबंधित प्रयोजनों के लिए और रीति से ही विनियोजित की जाएंगी, अन्यथा नहीं।“

ये संशोधन उनके पारिणामिक हैं जिन्हें हम पूर्व में पहले ही स्वीकार कर चुके हैं।

[ उपर्युक्त संशोधन द्वारा संशोधित यह अनुच्छेद अंगीकृत हुआ और संविधान में जोड़ा गया। ]

* * * *
अनुच्छेद 249

* माननीय सभापति : कोई और बोलना चाहता हो?

(कोई सदस्य खड़ा नहीं हुआ)

डॉ. अम्बेडकर, क्या आप कुछ बोलना चाहते हैं?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर (बम्बई : साधारण) : कहने के लिए कुछ नहीं

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है।

माननीय सभापति : अब मैं संशोधनों को मतदान के लिए रखता हूँ।

प्रश्न है :

“कि अनुच्छेद 249 के खंड (2) में, ’उस वर्ष में’ शब्द विलुप्त किए जाएँ।“

संशोधन अंगीकृत हुआ। माननीय सभापति : प्रश्न है :

“कि अनुच्छेद 249 के खंड (1) में ’ऐसे स्टाम्प शुल्क’ शब्दों के बाद, ’जो संसद द्वारा बनाई गई विधि के अधीन अधिरोपित हैं,“ शब्द अंतःस्थापित किए जाएं।

संशोधन अंगीकृत हुआ। माननीय सभापति : प्रश्न है :

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 4 अगस्त, 1949, पृ. 208