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“कि अनुच्छेद 249 के खंड (2) में ’भारत के राजस्व’ शब्दों के स्थान पर ’भारत की संचित निधि’ शब्द रखे जाएं।
संशोधन अंगीकृत हुआ। माननीय सभापति : प्रश्न है :
“कि यथासंशोधित अनुच्छेद 249 संविधान का भाग होगा।“
प्रस्ताव अंगीकृत हुआ।
[ यथासंशोधित अनुच्छेद 249 संविधान में जोड़ा गया। ]
अनुच्छेद 250
माननीय सभापति : प्रस्ताव है :
“कि अनुच्छेद 250 संविधान का अंग है।“
(संशोधन सं. 2842 से 2850 पेश नहीं किए गए।)
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है :
“कि अनुच्छेद 250 के अंत में निम्नलिखित जोड़ा जाए।“
’उक्त वितरण के शुद्ध आगम राज्यों द्वारा अपनी अधिकारिता के स्थानीय प्राधिकरणों को सौंपे जाएंगे।’
[ श्री सिधवा ने एक दूसरा संशोधन प्रस्तावित किया और उसके बाद उनका भाषण हुआ। ]
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माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मुझे बहुत अफसोस है। महोदय, मुझे शुरू में
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ही आपसे अनुरोध करना चाहिए था कि इस अनुच्छेद को अभी छोड़ दिया जाए।
माननीय सभापति : सुझाव है कि इस अनुच्छेद को अभी छोड़ दिया जाए।
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* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 4 अगस्त, 1949, पृ. 209