अनुच्छेद 251 - Page 79

58 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रा : मैं एक मुद्दे पर डॉ. अम्बेडकर से स्पष्टीकरण मांगना चाहूँगा। वह मुद्दा है। इस अनुच्छेद में उपबंधित है कि राजस्व का रियासतों में वितरण ऐसी रीति से और ऐसे समय से किया जाएगा जो विहित किया जाए। .... क्या अन्तरिम आवंटन वित्त समिति की सिफारिशों पर तय किया जाएगा। यह साफ नहीं है कि संविधान के प्रवृत्त हो जाने के ठीक बाद की और पश्चात्वर्ती काल में परिकल्पित आयोग की नियुक्ति से पूर्व की अवधि के बारे में क्या होने जा रहा है।

* माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : महोदय, स्पष्टीकरण बिल्कुल सरल है। यदि हम चाहते कि राष्ट्रपति के आवंटन आदेश किए जाने से पूर्व कोई अन्तरिम जांच न हो तो हमने केवल यह कहा होता कि ऐसा आवंटन जो संविधान के प्रारंभ से पूर्व अस्तित्व में था, तब तक जारी रहेगा जब तक कि वह आयोग की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा पुनः निर्धारित नहीं कर दिया जाता। हमने ऐसा नहीं कहा है, और हमने यह सोच समझकर नहीं कहा है, क्योंकि हम चाहते हैं कि जांच होनी चाहिए और जांच के आधार पर राष्ट्रपति आदेश द्वारा विहित करें। इसी कारण भाषा में अन्तर है।

पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रा : अर्थात् अंतरिम आयोग सीधे अभी नियुक्त किया जाएगा और उस आयोग की सिफारिश पर राष्ट्रपति आदेश द्वारा विहित करेंगे?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : हाँ, अन्यथा हम केवल यह कहते कि वर्तमान आवंटन तब तक जारी रहेगा जबतक कि राष्ट्रपति नया आदेश जारी नहीं करते हैं।

माननीय सभापति : अब मैं विभिन्न संशोधनों को मतदान के लिए रखूँगा, मैं सबसे पहले श्री उपेन्द्रनाथ वर्मन के संशोधन सं. 2858 को रखता हूँ।

श्री उपेन्द्र नाथ वर्मन : महोदय, डॉ. बी.आर. अम्बेडकर के वक्तव्य की दृष्टि से मैं अपना संशोधन वापस लेना चाहता हूँ।

संशोधन सभा की अनुमति से वापस ले लिया गया।

* * * *

माननीय सभापति : अब मैं डॉ. अम्बेडकर द्वारा प्रस्तावित संशोधन रखता हूँ। वह मौखिक संशोधन है।

प्रश्न है :

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 5 अगस्त, 1949, पृ. 222-23