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“कि अनुच्छेद 251 के खंड (2) में ‘‘भारत के राजस्व“ शब्दों के स्थान पर ‘‘भारत की संचित निधि’ शब्द रखे जाएं।’’
संशोधन अंगीकृत हुआ।
माननीय सभापति : इसके बाद भी टी.टी. कृष्णमाचारी का संशोधन है :
प्रश्न है :
“कि अनुच्छेद 251 के खंड (4) के उपखंड (ग) में, “भारत के राजस्व“ शब्दों के स्थान पर “भारत की संचित निधि“ शब्द रखे जाएं।
संशोधन अंगीकृत हुआ।
(प्रो. सक्सेना का संशोधन नामंजूर किया गया।)
यथा संशोधित अनुच्छेद 251 संविधान में जोड़ा गया।
अनुच्छेद 253
* माननीय सभापति : अब हम अनुच्छेद 253 को लेते हैं।
(संशोधन सं. 2883 और 2884 पेश नहीं किए गए।)
माननीय सभापति : संशोधन सं. 2885 .के बारे में क्या है ? डॉ. अम्बेडकर, क्या आप इसे पेश करना चाहते हैं ?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : नहीं, श्री त्यागी अपना संशोधन पेश करेंगे।
(संशोधन सं. 2886 से 2996 पेश नहीं हुए।)
माननीय सभापति : श्री बार्दोलोई, क्या आप अपना संशोधन संख्या 2897 पेश करेंगे?
माननीय श्री गोपीनाथ बार्दोलोई (असम : साधारण) : मैं संशोधन पेश करना नहीं
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चाहता लेकिन मैं अनुच्छेद के बारे में बोलना चाहूँगा।
(संशोधन सं. 2898 से 2902 पेश नहीं किए गए।) श्री महावीर त्यागी (संयुक्त प्रांत : साधारण) : महोदय, मेरा एक संशोधन है।
माननीय सभापति : मैंने सारे संशोधन समाप्त नहीं किए हैं। मैं उन्हें क्रमानुसार ले रहा हूँ और आपका संशोधन बाद में लूँगा संशोधन सं. 81.......
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 5 अगस्त, 1949, पृ. 224