अनुच्छेद 253 - Page 82

61

सरकार द्वारा उत्पाद शुल्क लगाने की अनुज्ञा देती है, प्रविष्टि सं. 85 भी है जो सीमा शुल्क लगाने की अनुज्ञा देती है। अब यदि अनुच्छेद 253 का उपखंड (1) संविधान का अंग रहा तो प्रकट है, कि केन्द्रीय सरकार नमक पर उत्पाद शुल्क या सीमा शुल्क वसूलने के प्रयोजनार्थ प्रविष्टि 86 या प्रविष्टि 85 का प्रयोग करने की हकदार नहीं होगी। यह बिल्कुल साफ है, क्योंकि खंड (1) नमक शुल्क की बाबत विधायी शक्ति से वंचित करता है जो अन्यथा प्रविष्टि सं. 86 या प्रविष्टि सं. 85 द्वारा वसूल किया जाता है। अब, अभ्यावेदन किया गया कि उत्पाद शुल्क वसूलने के लिए प्रविष्टि 86 के अधीन दी गई शक्ति का प्रयोग न किए जाने से देश को अधिक कठिनाई नहीं हो सकती, किन्तु सीमा शुल्क वसूलने के लिए प्रविष्टि 85 के अधीन दी शक्तियों पर पाबंदी यदि ऐसा कहना ठीक है तो, लगाने से भारी कठिनाई पैदा हो सकती है। क्योंकि इससे विदेशी नमक का आयात होगा और भारत सरकार के पास कोई विधायी उपचार नहीं होगा जिससे वह उसे भारत में आने से रोक सके और इससे भारतीय नमक उद्योग व्यवहारिक रूप से नष्ट हो जाएगा। अतः यह महसूस किया गया कि बेहतर यही होगा कि इस प्रतिबंध को हटा दिया जाए तथा समय के अन्दर उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों के अनुसार कार्रवाई करने का काम भावी संसद पर छोड़ दिया जाए। यही वजह है कि प्रारूपण समिति मेरे मित्र श्री त्यागी के संशोधन को स्वीकार करने के लिए तैयार है।

श्री आर. के. सिधवा : कृपया मुझे यह बताने का कष्ट करें कि प्रतिबंध की मद निदेशक नीति में क्यों दर्ज की गई थी ? यदि इस अनुच्छेद का खंड (1) हटा दिया जाए तो कृपया मैं जानना चाहूंगा कि निषेध संबंधी मद सरकार के निदेशक सिद्धांतों में क्यों शामिल की गई थी, तथा मुझे यह बताने का कष्ट करें कि कृपाण धारण करना मूल अधिकारों में क्यों रखा गया है?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : ओह, किरपान वाली बात बिल्कुल मिन्न

csMd j

है।

* * * *

* अनेक माननीय सदस्य : अब कोई भाषण नहीं।

माननीय सभापति : अब कोई भाषण न हों, यदि सदस्य ऐसा चाहें तो मैं इस अनुच्छेद पर बाद में चर्चा करने के लिए इसे यहीं छोड़ने की अनुज्ञा दे सकता हूँ।

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 5 अगस्त, 1949, पृ. 240