62 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय श्री के. संथानम : यह अनुच्छेद अभी छोड़ दिया जाए।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः अनुच्छेद अभी छोड़ा जा सकता है।
श्री महावीर त्यागी : अनुच्छेद अभी छोड़ा जा सकता है।
माननीय सभापति : यह अनुच्छेद सूची में कायम रहेगा।
** माननीय सभापति : आरंभ में, हम अनुच्छेद 254 पर चर्चा करेंगे।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर (बम्बई : साधारण) : महोदय, अनुच्छेद 254 पर चर्चा करने से पहले मैं अनुरोध करूंगा कि अनुच्छेद 253 के श्री त्यागी के संशोधन पर विचार करने की अनुज्ञा प्रदान की जाए क्योंकि प्रधानमंत्री इस पर बोलना चाहते हैं। यद्यपि वाद-विवाद समाप्त हो चुका है, फिर भी मैं अनुरोध करूंगा कि आप संशोधन पर मतदान कराने से पूर्व प्रधानमंत्री को भाषण देने की अनुज्ञा प्रदान करें।
माननीय सभापति : हाँ, माननीय पंडित जवाहरलाल नेहरू।
[ डॉ. अम्बेडकर के संशोधन द्वारा यथा संशोधित अनुच्छेद 253 संविधान में जोड़ा गया। ]
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अनुच्छेद 254
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : माननीय सभापति महोदय,
मैं प्रस्तावित करता हूँ :
“कि अनुच्छेद 254 के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाए :
‘‘254 (1) जूट पर और जूट उत्पादों पर निर्यात शुल्क के जूट और जूट उत्पादों प्रत्येक वर्ष के शुद्ध आगम का कोई भाग बंगाल, असम, जूट और जूट उत्पादों
पर नियति शुल्क के बिहार, उड़ीसा राज्यों को सौंप दिए जाने के स्थान पर उन स्थान पर अनुदान राज्यों के राजस्व में सहायता अनुदान के रूप में प्रत्येक स्थान पर अनुदान
वर्ष भारत की संचित निधि पर ऐसी राशियाँ भारित की जाएंगी जो राष्ट्रपति द्वारा विहित की जाएं।
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 5 अगस्त, 1949, पृ. 240
** ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 8 अगस्त, 1949, पृ. 241
*** ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 8 अगस्त, 1949, पृ. 242-43