अनुच्छेद 254 - Page 86

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की सिफारिशों का उल्लेख करना भूल गए। यदि वे उनका अवलोकन करेंगे तो मेरा विचार है, वे मुझसे सहमत होंगे कि विशेषज्ञ समिति ने ही सिफारिश की थी कि जूट पर शुल्क और जूट उत्पादों पर शुल्क के आवंटन की प्रणाली में परिवर्तन किया जाना चाहिए। इसलिए, मूल अनुच्छेद में परिवर्तन करने की प्रारूपण समिति की कोई कामना या इच्छा की बात नहीं है।

पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रा : उन्होंने प्रतिकर का भी उल्लेख किया था।

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माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं उस पर आऊंगा। प्रारूपण समिति द्वारा

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एक ही चीज स्वीकार नहीं की गई थी। वह था वित्त विशेषज्ञ समिति द्वारा विभिन्न प्रांतों को जूट पर निर्यात शुल्क में अपना हिस्सा खो दिए जाने के लिए सुझाया गया आवंटन। प्रारूपण समिति द्वारा महसूस किया गया कि संभवतः बिशेषज्ञ समिति द्वारा सुझाए गए आंकड़ों की और आगे जांच-परख होनी चाहिए। विशेषज्ञ समिति के पास उपलब्ध अल्पकाल को ध्यान में रखते हुए प्रारूपण समिति को पक्का भरोसा नहीं था कि विशेषज्ञ समिति द्वारा सुझाए गए आंकडे आगे जांचे परखे बिना उनके द्वारा स्वीकार किए जा सकते हैं। इसी डर के कारण, प्रारूपण समिति ने, विशेषज्ञ समिति द्वारा सुझाए गए आंकड़ों को स्वीकार करने के बजाय अपना स्वयं का फार्मूला अपनाया जो अब नये अनुच्छेद में विद्यमान है अर्थात् यह कि जूट शुल्क की हानि के प्रतिकर के बदले सहायता अनुदान राष्ट्रपति द्वारा विहित किए जाएंगे। अतः प्रारूपण समिति की यह इच्छा नहीं है कि वह चार प्रांतों से राजस्व के विधिसम्मत स्रोत को छीन ले जिसका उल्लेख इस अनुच्छेद विशेष में किया गया है जिसमें वे निहित अधिकार रखते हैं, और न ही प्रारूपण समिति ने विशेषज्ञ समिति द्वारा सुझाये गए आंकड़ां में कोई मूलभूत परिवर्तन करने का प्रयत्न किया। उन्होंने बस मामला राष्ट्रपति पर छोड़ दिया है।

अब, मेरे मित्र पं. हृदयनाथ कुंजरू ने बताया कि प्रारूपण समिति ने सदन के समक्ष अनुच्छेद में ’विहित’ शब्द की परिभाषा अन्तःस्थापित करके गलती की। उन्होंने तो यहाँ तक कहा कि अंतिम अनुच्छेद में भी, जो हमने पारित किया है, जो 260 है, ’विहित’ शब्द नहीं होना चाहिए था। अब मुझे यह कठिन लगता है, उनकी इस प्रस्थापना में चाहे कुछ भी गुणता हो कि ’विहित’ शब्द की परिभाषा को छोड़ दिया जाए। अनुच्छेद 254 के मुख्य भाग में हम कह चुके हैं सहायता अनुदान वे होंगे जो विहित किए जाएं। अब कोई वकील जानना चाहेगा कि ’विहित’ शब्द की व्यावहारिक परिभाषा होनी चाहिए जो अनुच्छेद 254 तक सीमित होगी या उसके उपबंधों से परिसीमित होगी अथवा हमें अनुच्छेद 260 में दिए गए उपबंधों को बदलना पडे़गा जिसमें ’विहित’ शब्द को परिभाषित किया गया है।