नया अनुच्छेद 254-क - Page 89

68 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

नया अनुच्छेद 254-क

* माननीय सभापति : अब हम अनुच्छेद 254-क पर आते हैं।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : मेरा सवाल व्यवस्था का है। महोदय, व्यवस्था का सवाल यह है कि नया अनुच्छेद 254-क में समाविष्ट करने वाला संशोधन सं. 82 पूर्णतः नया विषय है। हम सदन में यह पहले ही निश्चय कर चुके हैं कि संविधान के संशोधन एक निश्चित तारीख तक प्रस्तुत हो जाने चाहिए। हमने अपने संशोधन प्रस्तुत कर दिए हैं। नियमानुसार संविधान के और संशोधन प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

आज वही संशोधन ग्राह्य होंगे जो मूल संशोधनों के संशोधन हों साथ ही नियमित के संशोधन हों। निवेदन है कि वर्तमान संशोधन किसी भी संशोधन से सम्बद्ध नहीं है। इसमें लिखा है “अनुच्छेद 254 के बाद निम्नलिखित अनुच्छेद रखा जाए।“ ऐसा कोई प्रयत्न नहीं है या ऐसा कोई बहाना नहीं है कि यह किसी संशोधन के संदर्भ में है या उसके संबंध में है या उससे संयुक्त है। महोदय, निवेदन है कि यह अनुच्छेद इस प्रकार अन्तःस्थापित नहीं किया जा सकता।

डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : बेशक, मेरे माननीय मित्र द्वारा उठाया गया सवाल पूरी तरह विधिमान्य है, लेकिन मेरा निवेदन है कि यदि कोई संशोधन महत्वपूर्ण संशोधन है तो इस विषय में आपके पास असीम विवेकाधिकार है कि आप उसके लिए अनुमति दे सकते हैं।

माननीय सभापति : मेरे विचार में, पूर्व अवसरों पर भी हमने नये अनुच्छेद अन्तःस्थापित करने की अनुमति दी है और यह एक नया अनुच्छेद है जिसे अनुच्छेद 254 के बाद जोड़े जाने की कामना की गई है।

श्री टी. टी. कृष्णमाचारी : जब आपने प्रारूपण समिति को काम करने की अनुज्ञा दे दी है तो प्रारूप संविधान की निरन्तर जांच करना उसका कर्त्तव्य है और यदि उन्हें प्रतीत होता है कि उसमें कोई कमी है तो इस तथ्य के कारण कि समिति अस्तित्व में है, उसे इस कमी को दूर करने के लिए कदम उठाने होंगे। वर्तमान संशोधन उसी आवश्यकता से उत्पन्न हुआ है।

माननीय सभापति : पूर्व अवसरों पर मैंने नये अनुच्छेद पुनः स्थापित करने की अनुज्ञा दी है और यह एक नया अनुच्छेद है जिसे अनुच्छेद 254 के पश्चात् समाविष्ट करने की बात की गई है।

डॉ. अम्बेडकर, आप संशोधन पेश कर सकते हैं।

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 8 अगस्त, 1949, पृ. 261-64