नया अनुच्छेद 254-क - Page 90

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माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : महोदय, मैं प्रस्तावित करता हूँ -

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“कि अनुच्छेद 254 के पश्चात् निम्नलिखित अनुच्छेद अन्तःस्थापित किया जाए-

254-क. (1) कोई विधेयक या संशोधन, जो ऐसा कर या शुल्क जिसमें राज्य हितबद्ध ऐसे कराधान पर जिसमें ­राज्य हितबद्ध हैं प्रभाव डाल­ने वाले विधेयकों के लिए राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश की अपेक्षा हैं, अधिरोपित करता है या उसमें परिवर्तन करता है अथवा जो भारतीय आयकर से संबंधित अधिनियमितियों के प्रयोजनों के लिए परिभाषित “कृषि आय“ पद के अर्थ में परिवर्तन करता है अथवा जो उन सिद्धांतों को प्रभावित करता है जिनसे इस अध्याय के पूर्वगामी उपबंधों में से किसी उपबंध के अधीन राज्यों को ने वाले विधेयकों के लिए

राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश

की अपेक्षा

धनराशियाँ वितरणीय हैं या हो सकेंगी अथवा जो संघ के प्रयोजनों के लिए कोई ऐसा अधिभार अधिरोपित करता है जो इस अध्याय के पूर्वगामी उपबंधों में वर्णित है, संसद के किसी सदन में राष्ट्रपति की सिफारिश पर ही पुरःस्थापित या प्रस्तावित किया जाएगा, अन्यथा नहीं।“

(2) इस अनुच्छेद में, “ऐसा कर या शुल्क, जिसमें राज्य हितबद्ध हैं“ पद से ऐसा कोई कर या शुल्क अभिप्रेत है-

(क) जिसके शुद्ध आगम पूर्णतः या भागतः किसी राज्य को सौप दिए जाते हैं। या

(ख) जिसके शुद्ध आगम के प्रति निर्देश से भारत की संचित निधि में से किसी राज्य को राशियाँ तत्समय देय हैं।“

महोदय, मैं इसके एक-दो कारण बताना चाहूँगा कि हमने यह क्यों महसूस किया कि एकदम आखिर में एक नया अनुच्छेद संविधान में अन्तःस्थापित किया जाए। भारत सरकार अधिनियम में इसी प्रकार का उपबंध है। प्रारूपण समिति ने इस विषय पर विचार किया है। उन्होंने यह आवश्यक नहीं समझा कि उस अनुच्छेद को नये संविधान में समाविष्ट और अंतरित किया जाए। तथापि, जब प्रधानमंत्रियों का सम्मेलन आयोजित हुआ तो सुझाव दिया गया कि ऐसा अनुच्छेद उपयोगी ओर कदाचित आवश्यक होगा; क्योंकि जब एक बार संसद द्वारा प्रांतों और रियासतों के बीच आवंटन कर दिया गया तो ऐसा आवंटन उन विषयों में परिवर्तन करने के लिए विधेयक लाने के लिए जिनमें प्रांत आवंटन के फलस्वरूप हितबद्ध हो जाते हैं, किसी प्राईवेट सदस्य द्वारा किए गए किसी भी प्रयत्न से छेडे़ जाने के दायित्वाधीन नहीं होना चाहिए। यही कारण है कि प्रारूपण समिति अब इस संशोधन को लाई है ताकि प्रांतों को यह आश्वासन दिया जा सके कि आवंटन व्यवस्था में तब तक कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा जब तक कि इस आशय के विधेयक की राष्ट्रपति द्वारा सिफारिश न की जाए।