70 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय सभापति : इस अनुच्छेद का कोई संशोधन नहीं है।
माननीय सभापति : डॉ. अम्बेडकर क्या आप बोलना चाहते है?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं नहीं समझता कोई जवाब जरूरी है।
अनुच्छेद 254-क संविधान में जोड़ा गया।
अनुच्छेद 255
* माननीय सभापति : अब हम अनुच्छेद 255 पर आते हैं।
(संशोधन सं. 83 प्रस्तुत नहीं किया गया।)
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : महोदय, मुझे कृपया यह प्रस्ताव रखने की अनुमति देने का कष्ट करें :
“कि अनुच्छेद 255 में, “भारत के राजस्व“ शब्दों के स्थान पर भारत की ’संचित निधि’ रखे जाएं।
“कि अनुच्छेद 255 के प्रथम परन्तुक में ‘‘प्रथम अनुसूची के भाग 1 में तत्समय विर्निदिष्ट’’ शब्द और अंक हटा दिए जाएं।
“कि अनुच्छेद 255 के दूसरे परन्तुक के खंड (क) में ’तीन वर्ष’ शब्दों के स्थान पर ’दो वर्ष’ शब्द रखे जाएं।“
पहले दो संशोधन मात्र औपचारिक है...................
श्री नजीरुद्दीन अहमद : व्यवस्था के सवाल पर, सं. 86 बिल्कुल नया है और किसी से भी संबद्ध नहीं है। यह कोई औपचारिक विषय नहीं है। यह एक गंभीर विषय है।
माननीय डॉ. बी. आर अम्बेडकर : यही बताने की मैं कोशिश कर रहा हूँ।
श्री नजीरुद्दीन अहमद : यह संशोधन का संशोधन नहीं है यह संविधान का संशोधन है।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं सभापति की अनुमति से पेश करता हूँ।
श्री नजीरुद्दीन अहमद : मैं डॉ. अम्बेडकर को सभापति की अनुमति लेने के लिए विवश करना चाहता था।
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 8 अगस्त, 1949, पृ. 264-65