अनुच्छेद 256 - Page 93

72 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

(ख) ’संसद अवधारित कर सकेगी, शब्दों के पश्चात्’ ‘अथवा जब तक कि संसद ऐसा अवधारित न करे जैसा राष्ट्रपति अवधारित करे,’ शब्द अन्तःस्थापित किए जाएँ; और

(ग) निम्नलिखित स्पष्टीकरण अनुच्छेद के अंत में जोड़ा जाए -

”स्पष्टीकरण - ’विहित’ शब्द का वही अर्थ है जो अनुच्छेद 251 (4) (ख) में है।”

संशोधन अंगीकृत हुआ।

[ यथा संशोधित अनुच्छेद 255 संविधान में जोड़ा गया ]

अनुच्छेद 256

* माननीय सभापति : अब हम अनुच्छेद 256 पर आते हैं। यह खण्ड II में मुद्रित सूची में डॉ. अम्बेडकर का संशोधन सं. 2925 हैं।

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”कि अनुच्देद 256 के खंड (1) के स्थान पर निम्नलिखित खंड रखा जाए :

”(1) इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी, किसी राज्य के विधानमंडल की ऐसे करों से संबंधित कोई विधि जो उस राज्य के या उसमें किसी नगरपालिका, जिला बोर्ड, स्थानीय बोर्ड या अन्य स्थानीय प्राधिकारी के फायदे के लिए वृतियों, व्यापारों, आजीविकाओं या नियोजनों के संबंध में है, इस आधार पर अविधिमान्य नहीं होगी कि वह आय कर से संबंधित है।

महोदय, बाद के अनुच्छेद में प्रस्तावित है कि स्थानीय प्राधिकारियों को वृत्तियों, व्यापारों, आजीविकाओं और नियोजनों पर कतिपय कर एक सीमा तक उदगृहीत करने की अनुज्ञा दी जाए। डर है कि यदि ऐसा कर, राज्य द्वारा लगाया गया है तो उसे इस आधार पर प्रश्नागत किया जा सकता है कि यह आय कर के समान है और वह अनन्यतः केन्द्र के प्राधिकार में है। उपखंड (1) में वर्णित प्रयोजनों के लिए बनाई गई किसी विधि को ऐसी किसी चुनौती को रोकने के लिए इस उपबंध को प्रारूपण समिति द्वारा अत्यंत आवश्यक समझा गया है, और तदनुसार मैं इस संशोधन को प्रस्तावित करता हूँ।

माननीय सभापति : इसके बाद श्री पी. डी. हियत सिंगका के नाम में संशोधन

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 9 अगस्त, 1949, पृ. 301