75
वाले एक अध्यक्ष और चार अन्य सदस्यों से मिलकर बनेगा।”
महोदय, इस संशोधन का मुद्दा यह है कि मूलतः यह अनुच्छेद जिस रूप में था, इसमें लिखा था कि पांच वर्ष के अंत में आयोग नियुक्त किया जाएगा। महसूस किया गया है कि राष्ट्रपति को बहुत पहले आयोग नियुक्त करने की अनुज्ञा देनी आवश्यक है। परिणामस्वरूप अब हम उपबंध कर रहे हैं कि आयोग संविधान के प्रारंभ से दो वर्ष के भीतर नियुक्त किया जाना चाहिए।
माननीय सभापति : आप संशोधन संख्या 96 भी प्रस्तावित कर सकते हैं।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : महोदय, मैं प्रस्तावित करता हूँ
| csMd | j |
|---|
“कि अनुच्छेद 260 के खंड (3) के उपखंड (ख) में “भारत के राजस्व“ शब्दों के स्थान पर “भारत की संचित निधि“ शब्द रखे जाएँ। यह एक औपचारिक मात्र है।
माननीय सभापति : इस अनुच्छेद के संशोधन हैं जो पुस्तक में मुद्रित किए गए हैं।
पंडित ह्नदयनाथ कुंजरू : ..... इस अनुच्छेद से दर्शित होता है कि संविधान निर्माता महसूस करते हैं कि अनुच्छेद ...... के उपबंधों के अधीन......
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : यह अभी तक पारित नहीं हुआ है।
| csMd | j |
|---|
पं. ह्नदयनाथ कुंजरू : इसीलिए मैं इसका हवाला दे रहा हूँ अन्यथा इसका हवाला देने का कोई औचित्य नहीं था।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मुझे इसे वापस लेने का अधिकार है।
| csMd | j |
|---|
पं. ह्नदयनाथ कुंजरू : डॉ. अम्बेडकर का कहना है कि उनके पास इसे वापस लेने का अधिकार है। आशा है इसे वापस लेना काफी बुद्धिमानी होगी।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : नहीं यह उपांतरित हो सकता है।
| csMd | j |
|---|
* * * *
* माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : महोदय, सदन ने यह अवश्य समझ लिया होगा कि मेरे माननीय मित्र डॉ. कुजरू का संशोधन अनुच्छेद 260 के खंड (3) की ओर इंगित करता है जिसमे वित्त आयोग के कार्य दिये गए हैं। लेकिन, उनके संशोधन के सही महत्व को समझने की दृष्टि से, मैं व्यक्तिगत रूप से यह महसूस करता हूँ कि हमने जो दो अनुच्छेद 251 और 253 पारित किए हैं उनमें पहले ही उपबंधित
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 9 अगस्त, 1949, पृ. 311