अनुच्छेद 260 (जारी) - Page 97

76 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

की जा चुकी राजस्व आवंटन की पद्दति को जानना वांछनीय है। यह महसूस होगा कि प्रारूप संविधान आयकर के वितरण और आवंटन को केन्द्रीय उत्पाद शुल्क के वितरण और आवंटन से पृथक करता है। आयकर के संबंध में आगमों का वितरण और आवंटन ऐसा विषय है जो विनिश्चय के लिए राष्ट्रपति पर छोड़ा गया है। अनुच्छेद 251 (2) को खंड (4) (ख) (1) (2) के साथ पढ़ने से यही अर्थ निकलेगा। दूसरी ओर, केन्द्रीय उत्पाद शुल्क के वितरण और आवंटन के संबंध में मामला पूरी तरह संसद द्वारा निर्मित विधि द्वारा अवधारित करने के लिए छोड़ दिया गया है। आप अनुच्छेद 253 में स्पष्ट रूप से यह देख सकते हैं।

अब एक बज रहा है। मैं अपना भाषण कल जारी रखूंगा।

इसके बाद सभा बुधवार ता. 10 अगस्त 1949 को प्रातः 9 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

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अनुच्छेद 260 (जारी)

महोदय, कल बैठक के अंत में, मैं अपने मित्र पं. कुंजरू द्वारा उनके संशोधन के समर्थन में दिए गए तर्क पर विचार प्रकट कर रहा था। मैंने यह कहते हुए अपनी बात शुरू की थी कि सदन को अनुच्छेद 251(2) और अनुच्छेद 253 में पृष्ठभूमि के रूप में अंकित उपबंध को याद करना वांछनीय होगा ताकि माननीय सदस्य यह समझ सकें कि पं. कुंजरू वस्तुतः अपने संशोधन द्वारा क्या चाहते हैं।

अब मैं अपने कल के वक्तव्य का संक्षिप्त सारांश पेश करूंगा। स्थिति यह है, जहाँ तक आयकर का संबंध है, आगमों का वितरण ओर आवंटन तय करने का काम राष्ट्रपति पर छोड़ा गया है जबकि केन्द्रीय उत्पाद-शुल्क का वितरण और आवंटन संसद द्वारा निर्मित विधि द्वारा तय होगा।

अगला विचारणीय बिन्दु, यह है कि अनुच्छेद 260 में जो वित्त आयोग के विषय में है, अंतर्विष्ट उपबंध हैं। अनुच्छेद 260 के खंड (3) में उपबंधित है कि वित्त आयोग केवल करों के जो संसद द्वारा निर्मित विधि द्वारा वितरणीय बनाये गए हैं, वितरण और आवंटन के संबंध में ही नहीं बल्कि आयकर के वितरण और आबंटन के संबंध में भी सलाह देने और सिफारिशें करने से संबंधित है। यदि मैंने अपने मित्र पं. कुंजरू

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 10 अगस्त, 1949, पृ. 313-15