6. बंबई वंशानुगत कार्य अधिनियम - Page 101

84 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

1854 में सरकार ने राजस्व से मुक्त भू-संपत्ति के हकदार के विषय में जांच-पड़ताल करते हुए ‘पुनर्ग्रहण’ शब्द के अर्थ को परिभाषित करने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया। मैं 1854 के प्रस्ताव संख्या 2,449 का हवाला देता हूं। प्रस्ताव में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पुनर्ग्रहण का अर्थ भूमि को वापस लेना नहीं है, अपितु निर्धारित राजस्व को पूरा वसूल करना है। बंबई उच्च न्यायालय का मत है कि इस फैसले का समादर करते हुए सरकारी अनुदान के संबंध में उनके निर्णय के अनुसार पुनर्ग्रहण का अर्थ भू-राजस्व से है, भूमि से नहीं है और यह अनुचित भी नहीं होगा। महोदय! इसलिए मैं कानूनी आधार पर भी कह सकता हूं कि महार वतनदारों से सरकार केवल भू-राजस्व पुनर्ग्रहण कर सकती है, भूमि नहीं।

सरकार शायद इस उपबंध पर वित्तीय आधार पर आपत्ति कर सकती है। इस विधेयक से पूर्व की बहस के दौरान सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि वतनों का रूपांतरण होता है, अर्थात् यदि महारों को भू-राजस्व अदा करने पर अपनी वतन भूमि को अपने कब्जे में रखने की इजाजत दी जाती है, तो सरकार को इस स्थिति में एक वैतनिक एजेंसी को नियुक्त करना होगा और इस वैतनिक एजेंसी के पारिश्रमिक का व्यय-भार उनके

खजाने पर एक अतिरिक्त बोझ होगा। महोदय! अब मेरा पहला निवेदन इस प्रकार है : मैं नहीं मानता हूं कि खजाने पर इन कारणों से कोई अतिरिक्त भार पड़ेगा। यदि महार वतन का रूपांतरण कर दिया जाए और महारों को सेवाकार्य से मुक्त कर दिया जाए तथा यदि सरकार एक वैतनिक एजेंसी नियुक्त करती है, तो भी सरकार के पास इस नई एजेंसी को भुगतान के लिए एक कोष होगा। सबसे पहले उनके पास महारों से वसूल किए गए भू-राजस्व से उपलब्ध एक कोष होगा। इसके अतिरिक्त सरकार को बलूते की वसूली का अधिकार होगा, क्योंकि सरकार के आदेश के अनुसार गांव की जनता निगरानी और सुरक्षा के बदले में भुगतान के लिए उत्तरदायी है। महोदय! मेरा निवेदन है कि इस नई वैतनिक एजेंसी के रख-रखाव के लिए इन दोनों को मिलाकर बनाया गया कोष पर्याप्त होगा। महार वतन के रूपांतरण के विचार से सरकार के भयभीत होने का एक कारण यह है कि सरकार यह मानती है कि पहले कितने ही लोग काम पर लगाने होंगे, मेरे पास सही आंकड़े नहीं हैं। लेकिन मेरा मानना है कि सरकार लगभग 64,000 महारों को बंबई प्रेसिडेंसी में काम पर लगा रही है। महोदय! मेरा निवेदन है कि नई व्यवस्था के तहत उन्हें इतनी अधिक संख्या में लोगों को काम पर लगाने की आवश्यकता नहीं होगी। इस समय उन्हें सरकार द्वारा इसलिए काम पर लगाया गया है, क्योंकि उनका खर्च किसानों पर पड़ता है। कुछ गांवों में 16 महारों को काम पर लगाया गया है। उदाहरण के तौर पर, कुछ अन्य गांवों में, जैसे नागर जिले के एक गांव में 32 महार काम पर लगे हैं। महोदय! मैं निवेदन करता हूं कि इस समय महार बहुत अधिक संख्या में काम पर लगाए गए हैं। इस संख्या में अवश्य काफी कटौती की जा सकती है और जैसा कि मैं आशा करता हूं कि यदि कटौती होती है, तो वर्तमान संख्या का