बंबई वंशानुगत कार्य अधिनियम-संशोधन विधेयक
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के पारिश्रमिक के बतौर दी गई उसकी वतन भूमि सदा उसके अधिकार में रहेगी, तो मेरे विचार से सरकार को ऐसी वतन भूमि वापस ले लेनी चाहिए, जो स्थानापन्न रूप में काम करने वाले व्यक्ति के हाथ से निकल चुकी है। मेरे द्वारा प्रस्तुत की गई धाराएं कलक्टर को उस वतन भूमि के हस्तांतरण को अमान्य घोषित करने के लिए बाध्य करती है, जो किसी स्थानापन्न व्यक्ति को पारिश्रमिक के रूप में दी गई है। इन धाराओं को प्रस्तुत करने में मैंने वतन भूमि को दो वर्गों में सुपरिचित विभाजन को आधार बनाया है, वह भूमि जो पारिश्रमिक के रूप में दी जाती है और दूसरी वह जो पारिश्रमिक के रूप में नहीं दी जाती। इस तथ्य के फलस्वरूप कि स्थानापन्न व्यक्ति को पारिश्रमिक के उद्देश्य से तत्काल ही भूमि का होना आवश्यक नहीं है। पारिश्रमिक के रूप में भूमि न दिए जाने के मामले में हो सकता है कि कलक्टर वतनदार के पक्ष में अपना निर्णय नहीं लेता है और हस्तांतरण को अमान्य घोषित कर देता है, तो शिकायत की अधिक गुंजाइश नहीं है। परंतु जब भूमि का स्पष्ट रूप से पारिश्रमिक के लिए आरक्षण किया गया है, तो मेरा विचार है कि कलक्टर को इस संबंध में निर्णय की स्वतंत्रता नहीं होनी चाहिए और उसे ऐसे सभी मामलों में हस्तांतरण को अमान्य घोषित करना चाहिए।
महोदय! मैं स्वीकार करता हूं कि इस विधेयक का प्रारूप तैयार करते समय मुझसे इसमें दो खामियां रह गई हैं और इसकी मैं स्वीकारोक्ति करता हूं, क्योंकि मैं बहुत न्यायसंगत रहना चाहता हूं। महारों के लाभ के लिए, मैं किसानों पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालना चाहता हूं। सीधी सी बात यह है कि मैं वतन प्रथा का विरोधी हूं। मैं महारों की वतन प्रथा को समाप्त करने के लगातार प्रयास करता रहा हूं, यद्यपि मैं यह जानता हूं कि इससे निकट भविष्य में महारों को भारी क्षति होगी। परंतु मुझे पूरा विश्वास है कि वतन के ये बंधन ही उनके पिछड़ेपन के प्रमुख कारण हैं। मैं इस विषय में बहुत दूर की सोच रहा हूं और इसलिए मैं महारों की स्थिति किसानों से अच्छी बनाने के लिए कोई खास प्रयत्न नहीं कर रहा हूं और न ही कोई ऐसे प्रयत्न कर रहा हूं, जिससे महारों को किसानों की कीमत पर लाभ मिले। सदन के माननीय सदस्य देखेंगे कि बलूते की व्यवस्था को मैंने अपने विधेयक में जिस तरह सुव्यवस्थित किया है, उससे किसानों पर कोई अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा। मैंने स्पष्ट रूप से ‘समान’ शब्द का प्रयोग किया है। इसका अर्थ है कि महारों को पारिश्रमिक देने के लिए किसानों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाएगा। इससे ज्ञात होगा कि मैं कितना न्यायसंगत रहना चाहता हूं। इसलिए मैं स्वीकार करता हूं कि मेरे विधेयक में दो खामियां हैं। उनमें से एक धारा 9 (विधेयक के खंड 2 और खंड 3 के साथ) को इस तरह बदलना है, जिससे कलक्टर के लिए अनिवार्य हो जाता है कि वह भूमि को वापस ले। उसमें एक प्रावधान होना चाहिए, जिससे कलक्टर बेदखल किए गए गैर-वतनदार को हरजाना दिलवा सके। मैं स्वीकार करता हूं कि भूमि किसी