6. बंबई वंशानुगत कार्य अधिनियम - Page 107

90 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

को भी विश्वसनीय ढंग से और पूर्ण प्रतिफल के साथ हस्तांतरित की गई होगी। यह समझने की बात है कि जब किसी हस्तांतरी को भूमि से वंचित किया जाता है, तो उसे हरजाना देना चाहिए। जब मैंने पहले इस विधेयक का प्रारूप तैयार किया था, तो उसमें मैंने व्यवस्था की थी कि कलक्टर को गैर-वतनदार की भरपाई करने का अधिकार होना चाहिए, परंतु कुछ सरकारी सदस्यों के सुझाव पर मैंने उसे वापस ले लिया। परंतु मैं प्रवर समिति में उस संशोधन के लिए तैयार हूं। दूसरे, मुझे यह भी व्यवस्था करनी चाहिए थी कि महारों को यह निर्णय लेने की स्वतंत्रता हो कि वे किसानों की सेवा नहीं करेंगे, वैसे ही किसानों को यह निर्णय लेने की स्वतंत्रता होनी चाहिए कि वे महारों को सेवा में नहीं रखेंगे। संबंधित प्रवर समिति में जाने पर, मैं विधेयक में इस संशोधन के लिए भी तैयार हूं। मेरे विचार से विधेयक में ये ही सब बातें हैं, जिनकी व्याख्या होनी चाहिए।

अपनी बात समाप्त करने से पूर्व मुझे माननीय राजस्व मंत्री को यह स्पष्ट कर देना चाहिए कि इस विधेयक को संपूर्ण महार समुदाय का समर्थन प्राप्त है। इस विषय पर कोई मतभेद नहीं है। वास्तव में, इस विधेयक पर कोई मतभेद हो ही नहीं सकता है और इसके सही कारण हैं। यह विधेयक कोई अनिवार्य विधेयक नहीं है। यह विधेयक पूरी तौर पर विवेक पर आधारित है। अगर महार वतनदार यह नहीं चाहते हैं कि इस विधेयक की धाराओं को क्रियान्वित किया जाए, उन्हें क्रियान्वित नहीं किया जाएगा। स्थिति जैसी है, वैसी ही रहने दी जाएगी। परिवर्तन तभी होगा, जब महार उसके लिए जरूरत महसूस करेंगे। इसे उनकी इच्छा के विरुद्ध उन पर थोपा नहीं जाएगा।

श्री पी.आर. चिकोडी : यह एकपक्षीय व्यवस्था है। इसे द्विपक्षीय होना चाहिए।

डॉ. भीमराव अम्बेडकर : मैं जानता हूं कि मुझे वह संशोधन करना चाहिए, जो निकाल दिया गया है, लेकिन वह केवल प्रवर समिति में किया जाएगा। मेरा मानना है कि स्वयं महारों की ओर से इस विधेयक का विरोध नहीं हो सकता, क्योंकि विधेयक अनिवार्य नहीं है और यह उन्हें इसका लाभ उठाने को विवश नहीं करता। इसमें केवल उनके हितों के लिए निर्दिष्ट प्रावधान हैं, जिनका यदि वे चाहें तो लाभ उठा सकते हैं। इसलिए महारों ने इस विधेयक का विरोध नहीं किया है। उनकी ओर से वस्तुतः कोई विरोध हो भी नहीं सकता है। केवल यही नहीं कि उन्होंने विधेयक का विरोध नहीं किया, अपितु उन्होंने उसका हार्दिक स्वागत किया है। जब से मैं इस विधेयक को तैयार कर रहा हूं, मैंने किसी बात को महारों से छिपाया नहीं है। मैंने इस विधेयक के सिद्धांतों और प्रावधानों को संपूर्ण महार समुदाय के समक्ष अनेक सभाओं में प्रस्तुत किया है, जिससे कि वे इस विधेयक के संबंध में अपना मत अभिव्यक्त कर सकें और मुझे यह कहने में प्रसन्नता है कि संपूर्ण विधेयक और उसमें सम्मिलित सिद्धांत उनके द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिए गए हैं। इस कारण से कि सरकार को