बंबई वंशानुगत कार्य अधिनियम-संशोधन विधेयक
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यह कहने का कोई अवसर न मिले कि ये सभाएं मेरे द्वारा विधेयक का समर्थन प्राप्त करने के उद्देश्य से संचालित की गई थीं, मैं उन अधिकांश सभाओं से अनुपस्थित रहा, जो कि अन्य समुदायों के सदस्यों की अध्यक्षता में आयोजित की गई थीं। मेरे बिल्कुल पास बैठे मेरे माननीय मित्र श्री भोले इस बात पर मेरा समर्थन करेंगे कि बंबई में 5,000 से अधिक महार वतनदारों की सभा उनकी अध्यक्षता में हुई थी। हां, यह सच है कि कुछ लोगों ने महारों को यह कहकर कि इस विधेयक द्वारा उन्हें हानि हो सकती है, मूर्ख बनाने का प्रयास किया। लेकिन मैं मानता हूं कि माननीय सदस्य मेरे कथन की पुष्टि करेंगे कि महार समुदाय सर्वसम्मति से इस विधेयक का समर्थन करेगा। इस संबध्ां में मैं अपने माननीय मित्र श्री राजमा लखीचंद का उल्लेख करता हूं। उनकी अध्यक्षता में जलगांव में खानदेश के महार समुदाय के वतनदारों की सभा हुई थी, जहां मैंने उन्हें इस विधेयक के प्रावधानों और सिद्धांतों के बारे में बताया था। सामान्य अनुमान से लगभग 3,000 महार समुदाय के लोग सभा में उपस्थित थे। सभा भवन खचाखच भरा था और जब प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया, तो किसी भी महार ने उसका विरोध नहीं किया। मैं समझता हूं कि मेरे माननीय मित्र श्री थोराट इसकी पृष्टि करेंगे कि ऐसी ही एक सभा अहमदनगर जिले में भी हुई थी। वहां भी विधेयक को पूर्ण समर्थन मिला था। भिन्न-भिन्न स्थानों पर हुई छोटी-मोटी सभाओं का उल्लेख करना मैं आवश्यक नहीं समझता हूं। मैं सदन को विश्वास दिला सकता हूं कि महार समुदाय इस विधेयक को पारित कराने के लिए कृतसंकल्प है, और मैं अपने माननीय मित्रों को बता सकता हूं कि यदि सरकार ने वित्त सुविधा, या किसी अन्य आधार पर इन लोगों को मुक्ति देने से इंकार किया, तो राजस्व विभाग और महार समुदाय के मध्य युद्ध की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। यदि यह विधेयक पारित नहीं होता है, तो मैं भी परिषद में नहीं रहूंगा। मैं अपना शेष समय महार समुदाय को पूर्ण हड़ताल करने के लिए संगठित करने में व्यतीत करूंगा और माननीय राजस्व मंत्री को महसूस कराऊंगा कि इस विधेयक के सिद्धांत महार समुदाय के कल्याण के लिए अति आवश्यक हैं। मैं अपने अंतर्मन से कह रहा हूं, मैं कुछ भी छिपाना नहीं चाहता हूं। मैं अपने उद्देश्य के विषय में पूरी गंभीरता से कहना चाहता हूं। महोदय! मैं दलित वर्ग के लिए पिछले 3 वर्षों से हर संभव कोशिश कर रहा हूं। मेरे मार्ग में अनेक कठिनाइयां आईं और मैं निश्चित रूप से कह सकता हूं कि महार समुदाय की प्रगति के लिए जिस सबसे बड़ी कठिनाई का मुझे सामना करना पड़ेगा, वह संभवतः वतन से संबंधित होगी। मुझे प्रसन्नता है कि महार समुदाय भी भली प्रकार समझता है कि उनकी प्रगति के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा वतन ही है। अतः मैं आशा करता हूं कि यह परिषद इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कर देगी। इन शब्दों के साथ मैं विधेयक का पहला वाचन प्रस्तुत करता हूं।
इस पर प्रश्न किया गया।