94 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
है, वह अब इस प्रकार परिपालित होगा :
- संक्षिप्त शीर्षक — इस विधेयक को बंबई वंशानुगत कार्य (संशोधन) अधिनियम,
1937 कहा जाएगा।
- बंबई 3, 1874 की धारा 15 में संशोधन — धारा 15, खंड 1 अब इस प्रकार
पढ़ा जाएगा :
- खंड 1 — जब कोई वतनदार या वतन परिवार के सदस्य का वतन पर अधिकार होता है, कलक्टर को लिखित रूप में निवेदन करता है कि उसे सेवाकार्य के दायित्व से स्थायी रूप से मुक्त किया जाए, तो कलक्टर यदि आश्वस्त है कि उसका आवेदन प्रामाणिक है, तो उसे सेवाकार्य से मुक्ति दे देगा।
खंड 2 — जिस दिन से उसे सेवाकार्य के दायित्व से मुक्त किया जाएगा, वह वतनदार नहीं रहेगा और वतन संबंधी किसी भी अधिकार का हकदार नहीं होगा सिवाए उसके जैसा कि खंड 3 में दिया गया है।
खंड 3 — हरेक वतनदार जो इस धारा के खंड 1 और खंड 2 के अंतर्गत सेवाकर्य के दायित्व से मुक्त किया गया है और जो पूरा भुगतान करने के लिए राजी है, उसे उस भूमि को रखने का अधिकार है, जिस पर उसका वतनदार की हैसियत से अधिकार था और उसे बंबई भू-राजस्व संहिता की धारा 3 (16) के अंतर्गत उस भूमि का दखलकार माना जाएगा।
खंड 4 — कलक्टर के लिए यह विधिसम्मत होगा कि सेवाकार्य से मुक्त आवेदक को भूमि का उसका भाग दे दे, यदि वह भूमि एक से अधिक वतनदार या वतन परिवार के संयुक्त अधिकार में है।
खंड 5 — सेवाकार्य से मुक्त आवेदक को जो भूमि रखने की अनुमति दी गई है, उसे स्थानापन्न वतनदार को पारिश्रमिक के रूप में दी गई वतन भूमि नहीं माना जाएगा।
खंड 2 बदलकर खंड 6 हो जाएगा।
खंड 3 बदलकर खंड 7 हो जाएगा।
खंड 4 में ‘संयुक्त मालिकों की पूरी संख्या’ शब्दों के बाद ‘एक या ऐसे कुछ संयुक्त मालिक’ शब्द जोड़े जाएंगे। खंड 4 को खंड 8 कहा जाएगा।
1874 के बंबई 3 की धारा 16 का संशोधन — धारा 16 में ‘मौलिक’ शब्द के
स्थान पर ‘मुख्यतः’ होगा।
- 1874 के बंबई 3 की धारा 19 में संशोधन — धारा 19 में ‘यह निर्णय लेना
कि भुगतान उपज के रूप में या रुपए में किया जाएगा’ शब्द हटा दिए
जाएंगे।
- 1874 के बंबई 3 की धारा 19 के बाद नई धाराएं 19क, 19ख, 19ग और 19घ को