6. बंबई वंशानुगत कार्य अधिनियम - Page 113

96 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

अंतर्गत बनाए गए कानून अगला अधिवेशन शुरू होने से कम से कम एक माह

पूर्व विधान-मंडल में प्रस्तुत किए जाएंगे और ये विधान-मंडल के प्रस्ताव द्वारा

रद्द या परिवर्तित किए जाएंगे। यदि किसी कानून में परिवर्तन किया जाता है तो

सरकार उसे स्वीकार करेगी और तदनुसार कानून को पुनः प्रकाशित करेगी अथवा

यदि विधान-मंडल कानून को रद्द करता है, तो सरकार कानून को रद्द करेगी। उद्देश्य और कारणों से संबंधित विवरण

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विधेयक में तीन उद्देश्य निहित हैं। पहला, वतनदार की इच्छा पर वतन को परिवर्तित करने की अनुमति, दूसरा, वतनदारों के कुछ वर्गों को पारिश्रमिक के भुगतान की अधिक सुरक्षा व्यवस्था और तीसरा उद्देश्य वतनदारों द्वारा किए जाने वाले कार्यों की कानून द्वारा विशेष व्याख्या की व्यवस्था होना।

धारा 2-4 प्रथम उद्देश्य को प्रभावशाली बनाने के लिए हैं। धारा 7-9 का आशय दूसरे उद्देश्य को कार्यान्वित करना है और धार 10 विधेयक के तीसरे उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए है —

(1) धारा 2 वतनदार को जो अपने वतन के भाग के रूप में भूमि पर अपना

अधिकार खोए बिना सेवाकार्य के दायित्व से मुक्त होना चाहता है, ऐसा करने की

अनुमति देती है। इस धारा से ऐसे वतनदार को अपनी भूमि रखने की अनुमति

मिलती है। इससे सरकार को कोई हानि नहीं होती है, क्योंकि सरकार को उससे

निर्धारित धन बरामद करने का अधिकार है।

(2) धारा 3 और 4 विधिवत हैं।

(3) धारा 5 द्वारा यह संभव है कि वतन के संयुक्त मालिकों में से एक या कुछ

सेवाकार्य से मुक्ति के लिए आवेदन कर सकते हैं।

(4) धारा 6 का उद्देश्य ‘मुख्यतः’ शब्द के प्रयोग द्वारा यह ठीक-ठीक परिभाषित

करना है कि समाज की सेवा के लिए उत्तरदायी कौन है।

(5) धारा 7 में यह व्यवस्था है कि कलक्टर को यह तय करने की स्वतंत्रता नहीं

होगी कि वसूली उपज के रूप में की जाए या रुपयों में।

(6) धारा 8 अधिनियम में चार और नई धाराओं को जोड़ती है — धारा 19 (क)

वतनदारों को उपज के रूप में भुगतान को परिवर्तित करके रुपयों में भुगतान

करने के लिए कलक्टर को आवेदन करने का अधिकार देती है और कलक्टर से

समान राशि में परिवर्तित करने की अपेक्षा की जाती है।

धारा 19ख कलक्टर को बाध्य करती है कि यदि वतनदार चाहे तो वह धन उपकर की उगाही राजस्व के भाग के रूप में कर सकता है।

धारा 19ग कलक्टर को उस वतनदार के संबंध में जिसका सरकार और किसानों को दी गई सेवाओं के लिए पारिश्रमिक का भुगतान संयुक्त होता है, निर्णय लेने