बंबई वंशानुगत कार्य अधिनियम-संशोधन विधेयक
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का अधिकार देती है कि कितना पारिश्रमिक सरकार की सेवाओं से है और कितना किसानों की।
धारा 19घ वतनदारों को किसान की सेवा के दायित्व से मुक्त करने की छूट देती है, जिसके लिए उन्हें किसानों की सेवाओं के लिए पारिश्रमिक का वह अंश छोड़ना होगा, जिसका निर्धारण धारा 19ग के तहत कलक्टर द्वारा किया गया है।
(7) धारा 9 वतन के लाभ के संबंध में कलक्टर द्वारा धारा 21 के तहत किए गए किसी भी समझौते के लिए अधिकतम समय 10 वर्ष निर्धारित करती है।
(8) धारा 10 की केवल यह अपेक्षा है कि कर्तव्यों का पालन निर्धारित कानूनों के अनुसार किया जाए।
(हस्ताक्षर) भीमराव अम्बेडकर
एच.के. चेनानी
सचिव, बंबई विधान सभा पूना, 18 अक्तूबर 1937
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डॉ. भीमराव अम्बेडकर (बंबई नगर) : महोदय! मैं 1874 के बंबई वंशानुगत कार्य अधिनियम 3 में संशोधन के लिए विधेयक को प्रस्तत करने की अनुमति चाहता हूं। विधेयक में तीन उद्देश्य निहित हैं। पहला, वतनदार की इच्छा पर वतन का परिवर्तन करने की अनुमति, दूसरा, वतनदारों के कुछ वर्गों को पारिश्रमिक के भुगतान की अधिक सुरक्षा-व्यवस्था और तीसरा उद्देश्य वतनदारों द्वारा किए जाने वाले कार्यों की कानून द्वारा विशेष व्याख्या की व्यवस्था होना।
धारा 2-4 प्रथम उद्देश्य को प्रभावशाली बनाने के लिए हैं। धार 7-9 का आशय दूसरे को कार्यान्वित करना है और धारा 10 विधेयक के तीसरे उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए है।
धारा 2 वतनदार को जो अपने वतन के भाग के रूप में भूमि पर अपना अधिकार
खोए बिना सेवाकार्य के दायित्व से मुक्त होना चाहता है, ऐसा करने की अनुमति देती है। इस धारा से ऐसे वतनदार को अपनी भूमि रखने की अनुमति मिलती है। धारा 3 और 4 विधिवत हैं।
धारा 5 द्वारा यह संभव है कि वतन के संयुक्त मालिकों में से एक या कुछ सेवाकार्य से मुक्ति के लिए आवेदन कर सकते हैं।
* बोंबे लेजिस्लेटिव असेम्बली डिबेट्स, खंड 1, पृ. 1091-92, 17 सितंबर 1937। डॉ. अम्बेडकर द्वारा प्रस्तावित विधेयक, पृ. 105-109 पर पुनः प्रस्तुत।