100 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
या जो खोत का अधिकार प्राप्त करते हैं, न्यायालय के किसी भी मुकदमें अथवा कार्यवाही में लागू नहीं होंगे।
अधिसूचना के बाद खोत राजस्व के दायित्व से मुक्त होंगे — ऐसी अधिसूचना के जारी होने की तिथि से देय राजस्व से संबंधित खोत सरकार के प्रति किसी भी दायित्व से मुक्त होंगे।
खोत लोगों को मुआवज़ा — (I) इस अधिसूचना के परिणामस्वरूप खोत के रूप में उसके अधिकारों की क्षतिपूर्ति के लिए सकरार के लिए यह न्यायोचित होगा कि वह खोत को उचित मुआवज़ा दे, लेकिन शर्त यह है कि यह मुआवज़ा खोत के रूप में उसके पास भूमि से संबंधित भू-राजस्व संहिता के तहत निर्धारित वसूली के एक प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।
(II) सरकार का निर्णय मुआवज़े की राशि के संबंध में अंतिम और निर्णयात्मक होगा।
(III) सरकार के लिए यह विधिसम्मत होगा कि वह खोत को मुआवजे़ की राशि नकदी, ऋणपत्र अथवा वार्षिकी या किसी भी अन्य रूप में दे और भुगतान के रूप या प्रणाली के संबंध में सरकार का निर्णय अंतिम और निर्णायक होगा।
खोती व्यवस्था वाले गांवों के अधीनस्थ धारकों का दखलकार होना — जब से किसी भी क्षेत्र में खोती व्यवस्था को उस अधिनियम के प्रावधानों के तहत समाप्त कर दिया गया है, सभी लोग जिनके पास उस क्षेत्र में भूमि है, चाहे वह खोत के प्रबंध में हो अथवा उसके लाभदायक उपयोग में हो, उन्हें उस भूमि का जो उनके अधिकार में है भू-राजस्व संहिता, 1879 की धारा 3(16) के अंतर्गत उसका दखलकार माना जाएगा और उनके अधिकार तथा दायित्व अधिकृत भूमि पर वैसे ही होंगे, जैसे कि अहस्तांतरित भूमि पर दखलकारों के उल्लिखित संहिता के प्रावधानों के तहत हैं और उल्लिखित संहिता के सभी प्रावधान उन पर लागू होंगे।
दखलकारी अधिकारों के दावों से संबंधित झगड़ों का निर्धारण — किसी अमुक जोत का दखलकारी किसे होना चाहिए, यदि इस संबंध में कोई झगड़ा है, तो उस दावेदार को प्राथमिकता दी जाएगी, जिसका अधिसूचना से पूर्व 12 वर्ष में अधिकतम समय तक दखल रहा हो।
दखलकारी के अधिकार किसी के बाधा डालने पर नष्ट नहीं होते — अधिनियम के पारित होने के बाद अधीनस्थ धारक के अधिकारों में यदि कोई बाधा डालता है, तो धारा 6 के तहत उसके अधिकारों को कोई हानि नहीं पहुंचेगी।
खोत लोगों द्वारा मुआवजे़ के अधिकारों और अधीनस्थ धारकों की दखलकारी के अधिकारों के झगड़ों की जांच-पड़ताल — (I) सरकार के लिए यह न्यायोचित होगा कि वह जिस क्षेत्र में खोती व्यवस्था समाप्त हो गई है, वहां इस अधिनियम के तहत भूमि का दखलकार बनने का दावा करने वाले इच्छुक व्यक्तियों के बीच जो