7. खोती व्यवस्था उन्मूलन विधेयक - Page 118

खोती व्यवस्था उन्मूलन विधेयक

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झगड़े उठते हैं और जो झगड़े इस अधिनियम के तहत देय मुआवजे़ का दावा करने वाले व्यक्तियों के बीच उठते हैं, उनकी जांच-पड़ताल और फैसला करने के लिए एक अधिकारी की नियुक्ति करे।

(II) इस अधिनिमय के अंतर्गत जांच-पड़ताल के उद्देश्य से अधिकारी को संबंधित पक्षों या उनमें से किसी भी पक्ष सहित गवाहों को बुलाने और उन्हें उपस्थित रहने तथा व्यवहार विधि संहिता, 1908 के तहत दीवानी अदालत के मुकदमें में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के अनुरूप दस्तावेज़ों को प्रस्तुत करने को बाध्य करने का अधिकार होगा।

(III) भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा 9, 10, 11, 12, 13, 14 और 15 के प्रावधान इस अधिनियम के तहत मुआवजे़ की रकम निर्धारित करने और दखलकारी के अधिकार को मान्यता देने की कार्यवाहियों पर लागू होंगे।

(IV) अधिकारी के लिए यह न्यायोचित होगा कि खोत अथवा अधीनस्थ धारक को बाध्य करे कि वे सभी दस्तावेज़, रिकॉर्ड और रजिस्टर जो उनके पास हैं या उनके अधिकार में हैं, उन्हें मुआवजे़ की राशि या दखलकारी के अधिकारों के झगड़ों के निपटान से संबंधित आवश्यक जांच-पड़ताल के लिए प्रस्तुत करें।

(V) अधिकारी अपना निर्णय कलक्टर को पेश करेगा और भूमि दखलकारी के अधिकार के दोषों अथवा मुआवजे़ के दावों के संबंध में दावे करने वालों को लिखित रूप में अपने निर्णय से सूचित करेगा।

(VI) यदि अधिकारी इस बात से स्वयं ही संतुष्ट नहीं है कि दावेदारों में से कौन मुआवजे़ का अधिकारी है, तो वह मुआवजे़ के भुगतान को स्थगित कर सकता है, जब तक कि कोई वैध दीवानी अदालत संबंधित व्यक्तियों के मुआवजे़ के दावे के अधिकार को निश्चित न करे।

  1. अधीनस्थ धारकों के निर्देश जिनके दखलकारी के दावे को खारिज कर दिया गया है — (I) कोई व्यक्ति जो इस कारण पीडि़त है कि सरकार द्वारा विशेष रूप से नियुक्त किए गए अधिकारी ने उसके दखलकार होने के दावे को रजिस्टर करने से खारिज कर दिया है, तो वह एक लिखित आवेदन द्वारा कलक्टर से अपने दावे के प्रश्न पर मांग कर सकता है कि उसका दावा कलक्टर द्वारा जिला कचहरी को निर्णय के लिए जिसके न्यायक्षेत्र में सारी भूमि अवस्थित है अथवा सरकार द्वारा नियुक्त अभिकरण को सौंपा जाए।

(II) आवेदन में अधिकारी द्वारा लिए गए निर्णय के विरुद्ध आपत्ति के कारण दिए जाएंगे, जिन्हें दावा खारिज करने का आदेश जारी किए जाने के 90 दिन के अंदर प्रस्तुत करना होगा।

(III) कलक्टर आवेदन को प्रसंग के अनुसार जिला न्यायालय अथवा अभिकरण को भेजेगा। आवेदन क्रमांकित होगा और आवेदक को वादी तथा उस व्यक्ति अथवा