7. खोती व्यवस्था उन्मूलन विधेयक - Page 119

102 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

उन व्यक्तियों को जिन्हें अधिकारी द्वारा दखलकार घोषित किया गया है, प्रतिवादी मानकर केस को रजिस्टर किया जाएगा।

(IV) ऐसे आवेदन दर्ज होने पर न्यायालय या अभिकरण निर्देश देगा कि प्रतिवादी या प्रतिवादियों को नोटिस किया जाए कि वे नोटिस में उल्लिखित तिथि पर उपस्थित होकर दावे का जवाब दें।

(V) आवेदन को मुकदमें के रूप में सुनवाई के लिए व्यवहार विधि संहिता, 1908 के प्रावधान के तहत साधारण रूप में रखा जाएगा जैसा कि यह अन्य ऐसे मुकदमों के लिए लागू होगा।

(VI) किसी भी मुकदमें में न्यायालय द्वारा या अभिकरण द्वारा दिए गए फैसले या आदेश पर कोई अपील नहीं की जाएगी।

  1. लोगों द्वारा बयान दाखिल करना — (1) इस अधिनियम के पारित होने के तीन माह के अंदर कलक्टर एक लिखित नोटिस द्वारा हरेक खोत से नोटिस में उल्लिखित दिवस से पहले या उस दिवस पर हस्ताक्षरित बयान की मांग करेगा (यह दिन नोटिस जारी करने की तिथि से तीन माह बाद नहीं होगा) जिसमें यह व्यक्त किया जाएगाः

(I) सभी क्षेत्रों की सर्वेक्षित कुल संख्या, जिसका वह खोत अथवा अन्य रूप

में वरिष्ठ धारक है,

(II) 1920 से हर वर्ष की सर्वेक्षित संख्या के अनुससार इस अधिनियम के

पारित होने की तिथि तक जो व्यक्ति दखलकार रहे हैं, और

(III) प्रत्येक सर्वेक्षण क्रम में खोत के दावे, हक और स्वरूप का उल्लेख

हो।

(2) समय-समय पर खोत उपधारा (I) के तहत प्रस्तुत बयान के बाद में होने वाले किसी भी परिवर्तन के लिए लिखित रूप में कलक्टर को सूचित करेगा।

(3) बयान देने का दायित्व — पूर्ववर्ती धारा के अंतर्गत प्रत्येक खोत से बयान की अपेक्षा की जाती है, जिसके लिए वह भारतीय दंड संहिता की धारा 175 और 176 के अनुसार कानूनी तौर से बाध्य है।

  1. बयान साक्ष्य माना जाए — किसी भी केस या कार्यवाही में खोत या उसका प्रतिनिधि एक पक्ष है, तो तथ्यों की अपेक्षा धारा 11 के अनुसार खोत के बयान की प्रविष्टियां प्रामाणिक मानी जाएंगी।

  2. बयान न देने के लिए दंड — (I) यदि कोई खोत धारा 11 की उपधारा (i) और (II) में दिए गए प्रावधानों का पालन न करते हुए मांगे जाने पर बयान देने से इंकार करता है या बाद में होने वाले किसी परिवर्तन के विवरणों को बताने से इंकार करता है या अनदेखी करता है, तो उसे ऐसे हर अपराध के लिए दंडित किया