7. खोती व्यवस्था उन्मूलन विधेयक - Page 120

खोती व्यवस्था उन्मूलन विधेयक

जाएगा। जुर्माने की राशि 100 रुपए तक बढ़ाई जा सकती है।

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(II) यदि कोई खोत धारा 11 की उपधारा (1) के अनुसार निर्धारित अवधि में बयान देने में आनाकानी करता है तो कलक्टर को अधिकार होगा कि उससे विलंब शुल्क लिया जाए जो कि प्रतिदिन 5 रुपए से अधिक नहीं होगा। यह भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूल किया जाएगा।

  1. प्रमाणित प्रतिलिपि प्राप्त करने की व्यवस्था — उन सभी मामलों में जिनमें किसी खोत ने बयान दिया है, और उन सभी मामलों में जिनमें जांच-पड़ताल के दौरान दाखिल किए गए दस्तावेज़ और निर्णयों की प्रमाणित प्रतिलिपियां संबंधित पक्षों और उनके अधीन दावा करने वालों को सरकार से आवेदन करने पर सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित शुल्क देकर उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी।

  2. सरकार को कानून बनाने का अधिकार - (1) सरकार के लिए यह न्यायसंगत होगा कि इस अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने के लिए नियम बनाए और विशेष रूप से निम्नलिखित का प्रबंध करेः

(I) प्रपत्र, विषय-वस्तु और अधिसूचना के प्रकाशन और तामील की व्यवस्था,

(II) मुआवजे़ की राशि का निश्चय और भुगतान की प्रणाली,

(III) निर्देश किए गए दावों की सुनवाई और फैसलों के लिए अभिकरण की

स्थापना,

(IV) अधिनियम की कोई भी कार्यवाही के अंतर्गत दावेदार द्वारा किए गए आवेदन,

निर्देश किए गए दावे, दस्तावेज़ों की प्रमाणित प्रतिलिपियां, प्रविष्टियां और

निर्णय से संबंधित फीस तथा मूल्य को तय करना, और

(V) संबंधित पक्षों द्वारा दस्तावेज़ों को प्रस्तुत करवाना और उनकी सुरक्षा।

(2) इस धारा के अंतर्गत कानून बनाने का अधिकार बोंबे गवर्नमेंट गजट के पूर्ववर्ती प्रकाशन की शर्तों पर निर्भर करेगा।

(3) इस धारा के तहत तैयार किए गए नियम विधान सभा में उसके अगले अधिवेशन से कम से कम एक माह पहले प्रस्तुत किए जाएंगे। उपरोक्त सभा के प्रस्ताव द्वारा नियम बदले या रद्द किए जा सकते हैं। यदि किसी कानून को परिवर्तित या रद्द किया जाता है, तो सरकार को परिवर्तन स्वीकार करना होगा और उसे कानून को तदनुसार पुनः प्रकाशित करवाना होगा या नियम को रद्द करना होगा।

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  1. खोती व्यवस्था बंबई प्रेसिडेंसी में भू-धारण की एक लघु व्यवस्था है। यह अधिकतर रत्नागिरी जिले और कोलाबा तथा थाना जिले के कुछ भागों में प्रचलित है।

  2. भू-धारण की खोती व्यवस्था की शर्तें कुछ मामलों में कानून से और कुछ में रिवाज व प्रथा से तथा शेष मामलों में अनुदान से नियंत्रित हैं। रत्नागिरी जिले में