106 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
विधेयक के उद्देश्य हैं :
खोती व्यवस्था का उन्मूलन तथा सरकार और उन धारकों के बीच सीधा संबंध स्थापित करना, जो खोत लोगों के लाभप्रद अधिकार के अधीन हैं;
खोत लोगों के अधिकारों की क्षतिपूर्ति के लिए उचित मुआवज़ा देने के प्रावधान करने,
भू-राजस्व संहिता के अंतर्गत उन अधीनस्थ धारकों को वास्तव में जिनके कब्जे में भूमि है, उन्हें दखलकार का दर्जा देना, और
अन्य आकस्मिक प्रयोजनों के लिए प्रावधान करना।
महोदय! इन शब्दों के साथ, मैं सदन से विधेयक को प्रस्तुत करने की अनुमति चाहता हूं।
श्री. एस.एल. करंडिकर (रत्नागिरी उत्तर) : अध्यक्ष महोदय! मैं इस विधेयक को प्रस्तुत करने का विरोध करता हूं (रुकावट)। समान्य रूप से मैं विधेयक को प्रस्तुत करने का विरोध नहीं करता, क्योंकि निर्विरोध प्रस्तुत करने की अनुमति देना इस सदन में एक औपचारिकता बन गई प्रतीत होती है। परंतु एक कारण से इस विधेयक को प्रस्तुत करने का विरोध करना मैं अपना दायित्व समझता हूं।
अनुदान मांगों के समय जब इस सदन में भू-राजस्व के प्रश्न पर बहस की जा रही थी, माननीय राजस्व मंत्री ने हमें स्पष्ट रूप से बताया था और हमें यह आश्वासन दिया था कि प्रेसिडेंसी में भू-राजस्व नीति संबंधी पूरे मामले को किसी समय आगामी फरवरी में लिया जाएगा, अतः कुछ करने से पहले हमें इंतजार करना है। भू-राजस्व के किसी भी विषय पर हमें टुकड़ों में किसी विधान को स्वीकार नहीं करना चाहिए। अतः सरकारी पक्ष के सदस्य भी मुझसे सहमत होंगे कि टुकड़ों में जिस विधान का प्रस्ताव किया जा रहा है, उसे सदन में प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
अनेक दूसरी टिप्पणियां हैं, जिनका मैं विरोध करना चाहूंगा, क्योंकि शुरू की टिप्पणियां सदन में पढ़ी गई थीं, परंतु मेरा विश्वास है कि इन सब विषयों पर विचार और बहस के लिए अभी काफी समय है। इसलिए मैं सदन का अधिक समय नहीं लेना चाहता हूं। परंतु मेरे विचार से यह सिद्धांत की बात है। सरकार ने हमें आश्वासन दिया है कि प्रेसिडेंसी में भू-राजस्व के पूरे मामले पर विचार-विमर्श सदन में प्रस्तुत किया जाएगा और जनवरी-फरवरी में किसी समय एक व्यापक विधान सदन में प्रस्तुत किया जाएगा। अपवाद के रूप में कोलाबा और रत्नागिरी से संबंधित इस विधान को प्रस्तुत करने का कोई औचित्य नहीं है। इन टिप्पणियों के साथ मैं विधेयक को प्रस्तुत करने का विरोध करता हूं।
माननीय अध्यक्ष : मेरे विचार से किसी भी अन्य सदस्य को इसे बहस मानकर इसमें भाग लेने का अधिकार नहीं है। माननीय सदस्य जो विधेयक को प्रस्तुत करने