खोती व्यवस्था उन्मूलन विधेयक
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की अनुमति चाहते हैं, उन्हें जवाब देने का अधिकार है। और यदि यह जवाब देना चाहते हैं, तो मैं उन्हें अवसर दूंगा।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर : महोदय! मेरे माननीय मित्र श्री करंडीकर ने जो टीका-टिप्पणी की है, उसके संबंध में मैं नहीं समझता कि विस्तार से कोई उत्तर देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा है कि माननीय राजस्व मंत्री ने सदन को आश्वासन दिया है कि वह पूरी राजस्व व्यवस्था में परिवर्तन लाने के लिए एक नया विधेयक प्रस्तुत करेंगे। दुर्भाग्य से मैं उस समय उपस्थित नहीं था, जब यह आश्वासन दिया गया; और मैं व्यक्तिगत रूप से ठीक तरह से जानता भी नहीं हूं कि सदन को दिए गए आश्वासन का विषय और सीमा क्या है? महोदय! परंतु मैं सदन से इस बारे में निवेदन करूंगा। खोती व्यवस्था स्वयं में एक स्वतंत्र व्यवस्था है। यह व्यवस्था भू-राजस्व संहिता के तहत नहीं आती है। इसलिए यह कहा जा सकता है कि यह व्यवस्था इस प्रेसिडेंसी के भू-धारण की सामान्य प्रणाली का ही अभिन्न अंग नहीं है। यह बिल्कुल एक अलग विषय है। अतः ऐसी व्यवस्था जो सामान्य व्यवस्था के अंतर्गत न आती हो, उस पर विचार करने में मुझे कोई आपत्ति नहीं दिखाई देती।
सदन से मेरा दूसरा निवेदन यह है कि यदि माननीय सरकारी पक्ष के सदस्य वास्तव में वही करना चाहते हैं, जिसका उन्होंने सदन को आश्वासन दिया है, और यदि मुझे लगता है कि वे जो उपाय उस विधेयक के विषय से संबंधित लाना चाहते हैं, उससे मुझे संतुष्ट होना चाहिए, मुझे विधेयक को वापस लेने में कोई संकोच नहीं होगा, यदि मैं महसूस करूंगा कि उनका विधेयक मेरे विधेयक से श्रेष्ठ है। मैं नहीं सोचता कि इस अवसर पर इससे अधिक कहने की आवश्यकता है।
विधेयक प्रस्तुत किया गया और अनुमति प्रदान की गई।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर : महोदय! मैं विधेयक प्रस्तुत करता हूं।
माननीय अध्यक्ष : विधेयक प्रस्तुत हो गया।