8. ग्राम पंचायत विधेयक - Page 125

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ग्राम पंचायत विधेयक *

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डॉ. भीमराव अम्बेडकर : महोदय! मैंने इस विधेयक के प्रभावी मंत्री महोदय द्वारा दिए गए भाषण को बहुत ही ध्यानपूर्वक सुना है। मैं यह भी कहना चाहूंगा कि मैंने उनके इस भाषण को अत्यधिक गंभीरता से लिया है। मुझे विश्वास है कि इस बारे में कोई मतभेद नहीं हो सकता है कि इस विधेयक का संबंध कुछ अत्यधिक महत्त्वपूर्ण मसलों से है। इस विधेयक से जुड़े महत्त्वपूर्ण मसलों को ध्यान में रखते हुए, मैं यह कहने के लिए बाध्य हूं कि जहां तक यह प्रेसिडेंसी की ग्रामीण जनसंख्या से संबंधित नागरिक सुविधाओं को प्रभावित करता है, इसका संबंध न केवल स्वशासन से है, बल्कि इसका प्रभाव ग्रामीण जनसंख्या के जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति पर भी पड़ता है। सभी संबंधित पक्षों के प्रति न्याय की दृष्टि से मंत्री महोदय को इस विधेयक से संबद्ध निहितार्थों पर विचार-विमर्श के लिए अधिक समय देना चाहिए था, परंतु मंत्री महोदय ने विधेयक को विचार-विमर्श के लिए प्रस्तुत करने से पूर्व सात दिन का समय गुजर जाने दिया और मात्र कानूनी आवश्यकताओं की पूर्ति करके उन्होंने आत्म-तुष्टि करने का ही प्रयत्न किया है। मेरे विचार से विधेयक पर विचार-विमर्श के लिए न केवल सात दिन, बल्कि सात महीने का समय नियत किए जाने की आवश्यकता है। मेरा सुझाव है कि अभी भी यह कोई गलत कदम नहीं होगा, यदि मंत्री महोदय विधेयक से संबंधित मसलों पर जनता की प्रतिक्रिया जानने के उद्देश्य से इसे प्रचारित करें। यह कदम उठाने के लिए मेरा उनसे विनम्र निवेदन है। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो मैं उनके विचारार्थ दो अन्य अत्यंत महत्त्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत करना चाहूंगा। महोदय! मेरा कहना है कि वर्तमान सरकार इस विधेयक को प्रस्तुत करने के लिए सक्षम नहीं है। सरकार इस तथ्य से अवगत है कि प्रशासन की वर्तमान प्रणाली एक बदनाम प्रणाली है। ऐसा मैं केवल दोषारोपण करने के उद्देश्य से नहीं कर रहा हूं। हम तथ्यों के बारे में जैसा जानते हैं, मैं उन्हें उसी रूप में प्रस्तुत करने का प्रयत्न कर रहा हूं। महोदय! प्रेसिडेंसी की जनता का कोई भी वर्ग इस सरकार के प्रशासन और कार्यकलापों से

* बोंबे लेजिस्लेटिव काउंसिल डिबेट्स, खंड 35, 1128-36, 6 अक्तूबर 1932