8. ग्राम पंचायत विधेयक - Page 130

ग्राम पंचायत विधेयक

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की ओर भी दिलाना चाहता हूं। मैं हिन्दुओं व दलित वर्गों के मध्य हुए पूना समझौते की बात कर रहा हूं, जिस पर पिछले महीने की 24 तारीख को हस्ताक्षर किए गए। मुझे विश्वास है कि अनेक सदस्यों ने समझौते की शर्तें अवश्य पढ़ी होंगी, लेकिन मैं इसके एक खंड की ओर विशेष ध्यान दिलाना चाहता हूं। इस खंड में यह स्वीकार किया गया है कि समस्त स्थानीय निकायों में दलित वर्गों के प्रतिनिधित्व के अधिकार को स्वीकृत किया जाएगा और समझौते के उस हिस्से को कार्यान्वित करने के लिए प्रयास किए जाएंगे। महोदय! मैं हिन्दू सदस्यों का ध्यान समझौते के उस हिस्से की ओर दिलाना चाहता हूं और मुझे यकीन है कि पिछले महीने की 24 तारीख से पहले जो कुछ भी विचार रहे हों, लेकिन वे अब समझौते की शर्तों का निष्ठापूर्वक पालन करेंगे।

महोदय! अब मैं विधेयक के दूसरे भाग पर आता हूं। मुझे शुरू में ही यह बता देना चाहिए कि जब मैंने इस विधेयक को पढ़ा था, मैं कहना चाहता था कि यह विधेयक अंशतः अच्छा और अंशतः खराब है। लेकिन पूरा विधेयक और विधेयक में निहित समस्त प्रावधानों को पढ़ने के बाद मैं अपना विचार बदलने को बाध्य हूं। अब मुझे लगता है कि यह पूरे का पूरा ही खराब है। इसका केवल कुछ ही भाग खराब नहीं है, बल्कि इसके अन्य भाग भी बहुत ही खराब हैं। महोदय! मैं ग्राम पंचायतों के विधेयक के न्यायिक प्रावधान के सदंर्भ में कह रहा हूं। मैं नहीं जानता कि स्थानीय स्वशासन मंत्री महोदय के अनुसार न्यायपालिका के लिए अपेक्षित गुण क्या होने चाहिए, जिस पर दीवानी व फौजदारी मामले सुलझाने के लिए विश्वास किया जा सके। सदन में शुरू में ही उन्होंने जो परिचयात्मक टिप्पणी की थी, उस दौरान मैं इस बारे में उनके विचार जानने का इच्छुक था, पर वह इस मुद्दे पर चुप ही रहे। मेरे विचार से इस बात से सब सहमत होंगे कि दीवानी व फौजदारी मामलों का निर्वाह करने के कार्य को सौंपने से पहले, न्यायपालिका में तीन गुण होने आवश्यक हैं। वह कानून में प्रशिक्षित होनी चाहिए, अपने दृष्टिकोण में निष्पक्ष होनी चाहिए और मैं निवेदन करता हूं, वह स्वतंत्र होनी चाहिए। अब हमें इन तीनों गुणों को इस विधेयक के प्रावधानों में लागू करना चाहिए। मंत्री महोदय इस विधेयक में क्या प्रावधान रखते हैं? वह कहते हैं, ‘हम वयस्क मताधिकार के द्वारा पांच अथवा सात सदस्यों की पंचायत का चुनाव करेंगे; ये व्यक्ति तीन वर्षों तक कार्यभार संभालेंगे। इन तीन वर्षों के दौरान ये न सिर्फ स्थानीय स्वशासी निकाय के कार्यों का निर्वाह करेंगे, बल्कि इसके साथ वे कुछ फौजदारी व दीवानी मुकदमों की न्यायिक जांच करने का भी काम करेंगे।’ विधेयक के प्रावधान का यही स्तर है।

अब, मैं मंत्री महोदय से जो पहला प्रश्न पूछना चाहता हूं, वह है : इन पांच व्यक्तियों के पास जिनका चुनाव वयस्क मताधिकार द्वारा होगा, क्या उनसे वह उम्मीद करते हैं कि उन्होंने न्यायाधीश के कर्तव्यों का निर्वाह करने के लिए पर्याप्त न्यायिक प्रशिक्षण प्राप्त किया होगा? महोदय! मैं यह निवेदन करना चाहता हूं कि न्यायिक निर्णयों के लिए परिपक्व निर्णय की जरूरत है; उन्हें विस्तृत वैधानिक ज्ञान की आवश्यकता है