8. ग्राम पंचायत विधेयक - Page 131

114 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

(ठहाका)। इसमें हंसने की कोई बात नहीं है, क्योंकि यह एक गंभीर मामला है। इस बात को ध्यान में लें। जब आई.सी.एस. के सदस्य हाई कोर्ट या न्यायपालिका में अपने लिए कुछ आरक्षित स्थानों की मांग करते हैं, तब हम बहुत उत्तेजित हो जाते हैं। हमारी आपत्ति का कारण क्या है? अगर मैंने आपत्ति को सही ढंग से समझा है, तो वह यह है कि जिन व्यक्तियों ने आई.सी.एस. की परीक्षा उत्तीर्ण की है, उनके पास कोई न्यायिक प्रशिक्षण नहीं होता और न्यायिक प्रशिक्षण न होने के कारण, हम उनको न्यायिक अधिकार नहीं सौंप सकते। आपत्ति का यही मुख्य कारण है। हम न सिर्फ न्याय चाहते हैं, बल्कि ऐसे न्यायाधीश चाहते हैं, जो अपने कर्तव्य निभाने में कुशल हों। अब में मंत्री महोदय से यह पूछना चाहता हूं कि क्या वह सोचते हैं कि ऐसा जन समुदाय जो निरक्षर है, अज्ञानता और अंधविश्वासों से घिरा हुआ है, क्या वह ऐसे पांच अच्छे व्यक्तियों को चुन सकता है, जिन पर न्यायाधीश के कर्तव्यों का निर्वाह करने का कार्य सौंपा जा सके?

श्री एस.एम. कारभारी : क्या हम इतने बुरे हैं?

डॉ. भीमराव अम्बेडकर : मैं नहीं जानता। इस मामले में हमारे बीच मतभेद हो सकते हैं। लेकिन यह मेरा दावा है और अगर यह मान भी लिया जाए कि इन व्यक्तियों के लिए अपेक्षित वैधानिक प्रशिक्षण जरूरी नहीं है, तब भी हमें इतनी अपेक्षा तो करनी चाहिए कि उनको अपने उचित-अनुचित कर्तव्य, निष्पक्षता तथा नैतिकता का ख्याल हो। ऐसा जनसमुदाय जो जातिवाद से जकड़ा हुआ है, प्राचीन पूर्वाग्रहों से ग्रस्त हो, जो समानता के भाव का उपहास उड़ाता हो और जो सामाजिक भेदभाव की धारणा से प्रभावित हो, तथा जो यह सोचता हो कि एक व्यक्ति ऊंचा, दूसरा नीचा है क्या उससे उम्मीद की जा सकती है कि उसके पास मात्र न्याय करने के लिए ही सहज भावना होगी? महोदय! मैं इस प्रस्ताव को नकारता हूं और निवेदन करता हूं कि हमारे लिए इन पंचों के हाथ में अपना जीवन, अपनी स्वतंत्रता और अपनी संपत्ति को सौंपने की उम्मीद करना उचित नहीं है।

अगला प्रस्ताव जो मैं इस सदन के सम्मुख प्रस्तुत करना चाहता हूं वह है : क्या इन पंचायतों से यह अपेक्षा करना संभव है कि ये न्यायाधीश का दायित्व निष्पक्षता से निभा सकेंगी? हम तथ्यों का सही विश्लेषण करें। मुझे विश्वास है कि इस सदन का कोई माननीय सदस्य इस बात से इंकार नहीं करेगा कि कुछ ही ऐसे गांव हैं जहां लोगों में आपसी रंजिश न हो, ब्राह्मणों और गैर-ब्राह्मण के बीच झगड़े . . .

दीवान बहादुर डी.आर. पाटिल : ये हमेशा चलते रहेंगे।

डॉ. भीमराव अम्बेडकर : अगर वे ऐसा करते हैं, तो आपके लिए बहुत बुरा है। महोदय! मैं निवेदन करता हूं कि ब्राह्मण और गैर-ब्राह्मण के बीच गुट हैं। यह तथ्य ध्यान में रखते हुए कि माननीय सदस्य श्री राव बहादुर काले मेरे सुझाव पर हंस रहे थे, मैं इस मामले में एक उद्धरण पेश करना चाहता हूं जो कि उनके ही जिले सतारा