8. ग्राम पंचायत विधेयक - Page 132

ग्राम पंचायत विधेयक

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से संबंधित है। मुझे याद है कि एक बार सतारा जिले के किसी गांव में ब्राह्मण और गैर-ब्राह्मणों में झगड़ा इतना बढ़ गया था कि गैर-ब्राह्मणों ने ब्राह्मणों के पूर्ण बहिष्कार की घोषणा की थी। उन्हें दाढ़ी बनवाने के लिए नाई नहीं मिला; उन्हें गांव के बनिए ने सामान नहीं बेचा, उन्हें अपने कार्यों के लिए कामगार नहीं मिले। ब्राह्मणों को या तो दाढ़ी बनानी पड़ती थी या दाढ़ी बनवाने के लिए सात मील दूर सतारा तक पैदल चलकर जाना पड़ता था। इस तरह दलित वर्गों और गैर-ब्राह्मणों के बीच झगड़े हैं।

एक माननीय सदस्य : वे खत्म हो गए हैं।

डॉ. भीमराव अम्बेडकर : दुर्भाग्यवश खत्म होने के बजाए झगड़े आम हो गए हैं। न सिर्फ हिन्दुओं के बीच आपसी झगड़े हैं, बल्कि हिन्दू और मुसलमानों के बीच भी झगड़े हैं और ये झगड़े कोई साधारण नहीं है, गंभीर हैं। मैं मंत्री महोदय से यह कहना चाहता हूं कि वह विचार करें कि क्या ऐसे वातावरण में निर्वाचित पंचायत विभिन्न जातियों और विभिन्न वर्गों को निष्पक्ष न्याय दे सकेगी? यह एक प्रस्ताव है और मैं निवेदन करता हूं कि इस पर सदन व मंत्री महोदय को गंभीरतापूर्वक विचार करना चाहिए।

अगला प्रश्न मैं यह पूछना चाहता हूं कि माननीय महोदय जिस न्यायपालिका को अस्तित्व में लाना चाहते हैं, क्या वे उससे उम्मीद करते हैं कि वह एक स्वतंत्र न्यायपालिका होगी? महोदय! उनका प्रस्ताव क्या है? उनका प्रस्ताव यह है कि न्यायपालिका का निर्वाचन होगा, जैसा कि पंचायत के प्रावधानों का अर्थ है। जो पंचायत न्याय की व्यवस्था करेगी, उस पंचायत का चुनाव गांव की वयस्क जनता द्वारा किया जाएगा। मैं उनसे यह पूछना चाहता हूं कि वह न्यायाधीश जिसे जनसाधारण के मतों के आगे झुकना है, क्या वह न्याय करने से पहले दो बार सोचेगा नहीं कि कहीं न्याय करते हुए वह मतदाता विशेष की भावना को ठेस तो नहीं पहुंचा रहा है। मान लीजिए, हिन्दू-मुसलमानों के बीच दंगे होते हैं; और मुसलमान को एक अपराध के लिए जिसकी सुनवाई पंचायत द्वारा होनी है, पंचायत के समक्ष लाया जाता है; पंचायत का एक हिन्दू सदस्य यह सोचता है कि न्याय मुसलमान के पक्ष में है। क्या मंत्री महोदय और सदन यह मानता है कि वह व्यक्ति जिसे कुछ महीने या वर्ष के अंतराल में चुनाव लड़ना है, वह यह सोचेगा कि उसे अपनी सीट बचाने की अपेक्षा मुसलमान के प्रति न्याय करना चाहिए? वह क्या करेगा?

दीवान बहादुर डी.आर. पाटिल : दंगों के मामले ग्राम पंचायत के समक्ष नहीं आते हैं।

डॉ. भीमराव अम्बेडकर : मैं इसे एक उदाहरण की तरह प्रस्तुत करता हूं। यह किसी और अपराध के लिए हो सकता है।

महोदय! मैंने ऐसी न्यायपालिका कहीं नहीं देखी, जिसका निर्वाचन किया जाता है। केवल अमरीका में न्यायपालिका का चुनाव होता है, और आप जानते हैं, इससे समस्त अमरीकी संघ में न्यायाधीश बदनाम हो गए और साधारण न्याय भ्रष्टाचार का दूसरा नाम