8. ग्राम पंचायत विधेयक - Page 134

ग्राम पंचायत विधेयक

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बंद कर दिया गया। इस बहिष्कार की योजना अक्सर इतने विस्तृत पैमाने पर

की जाती है कि दलित वर्गों पर सार्वजनिक सड़कें इस्तेमाल करने के लिए रोक

लगा दी जाती है और गांव के बनिए को कहा जाता है कि उनको दैनिक उपभोग

की आवश्यक वस्तुएं न बेचें। उपलब्ध प्रमाणों के अनुसार, कभी-कभी छोटे-छोटे

कारण भी दलित वर्गों के विरुद्ध सामाजिक बहिष्कार की घोषणा के लिए पर्याप्त

होते हैं। ऐसी घटनाएं दलित वर्ग द्वारा सार्वजनिक कुओं से पानी लेने के अपने

अधिकार के प्रयोग करने पर होती हैं, लेकिन ऐसे मामले भी कम नहीं हैं, जब

केवल इसलिए सख्त बहिष्कार की घोषणा की गई कि दलित वर्ग के व्यक्ति ने

जनेऊ धारण कर लिया, भूमि का एक टुकड़ा खरीद लिया, अच्छे कपड़े या आभूषण

पहन लिए या दुल्हे को घोड़े पर बिठाकर गली में से बारात निकाल ली।

महोदय! यही हमारी स्थिति है। हम हर तरफ से घिरे हुए हैं और मैं ऐसे लोगों के हाथों में दीवानी या फौजदारी, दोनों न्यायिक अधिकार देने के लिए अपनी सहमति नहीं दे सकता, जो हमारे लक्ष्य व उद्देश्यों को असफल करने के लिए लगातार तथा सुविचारित षड्यंत्र कर रहे हैं।

एक माननीय सदस्य : नहीं, नहीं।

डॉ. भीमराव अम्बेडकर : मुझे मंत्री महोदय द्वारा प्रस्तुत किए गए विधेयक में निहित उद्देश्य के प्रति पूर्ण सहानुभूति है। अगर मैंने उन्हें ठीक समझा है, तो वह केवल यह चाहते हैं कि गांव वालों को सस्ता और सुगम न्याय मिले। मुझे लगता है कि अपने विधेयक में उन्होंने जो न्यायिक प्रावधान दिए हैं, उनके अंतर्गत यही उद्देश्य निहित है।

अगर ऐसी ही बात है, तो मेरे ख्याल से इसे करने का एक और बेहतर तरीका है। यह आवश्यक नहीं है कि पंचायतों को न्यायिक अधिकार दिए जाएं। हमारे यहां नगरों में पहले से ही अवैतनिक मजिस्ट्रेटों की पीठ हैं। इस व्यवस्था को विस्तृत रूप देना पूर्णतः संभव है, जिससे कि हम प्रत्येक जिले को न्यायिक परिमंडलों में विभक्त कर सकें, सुविधा के अनुसार जिसका क्षेत्र दो या तीन मील तक फैला हो, और उस मंडल में न्यायिक कार्यों का निष्पादन करने के लिए तीन या अधिक व्यक्तियों को सरकार नामांकित करे — मैं ‘नामांकित’ शब्द पर जोर देता हूं। ये तीनों व्यक्ति एक दिन परिमंडल में मजिस्ट्रेट की हैसियत से बैठेंगे और फौजदारी मामलों को सुलझाएंगे। इस तरीके से आप सस्ता और सुगम न्याय पा सकते हैं। साथ ही आपके पास स्थानीय प्रभाव और निर्वाचन व्यवस्था के अवगुणों से मुक्त न्यायपालिका होगी। महोदय, मेरे

ख्याल से यह व्यवस्था उद्देश्य को पूरा करेगी। जो कुछ भी हो, मैं साफ शब्दों में कह देना चाहता हूं कि अगर मंत्री महोदय जोर देते हैं कि विधेयक जिस रूप में है, उसे उसी रूप में उसके समस्त प्रावधानों के साथ पारित कर दिया जाए, विशेषकर वे प्रावधान जिन्हें वह सिद्धांत मानते हैं, तो मैं कहना चाहता हूं कि मैं इस विधेयक का विरोध करता हूं (तालियां)।