8. ग्राम पंचायत विधेयक - Page 135

118 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

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डॉ. भीमराव अम्बेडकर : माननीय अध्यक्ष महोदय! मुझे इस विधेयक के प्रभारी माननीय मंत्री महोदय को यह संशोधन प्रस्तुत करने के लिए देरी से ही सही, बधाई देनी चाहिए, जिसके अंतर्गत इस प्रेसिडेंसी के दो मुख्य अल्पसंख्यकों को कुछ न्याय दिलवाने का प्रयत्न किया गया है। मैं मंत्री महोदय का आभारी तो हूं ही, मुझे लगता है कि अपने माननीय मित्र श्री सिन्हा द्वारा किए गए संशोधन का मुझे समर्थन करना चाहिए। मैं नहीं जानता कि स्थानीय स्वशासन के माननीय मंत्री और मेरे माननीय मित्र जो कि विपक्षी दल की अग्रिम पंक्ति में बैठे हुए हैं, उन दोनों के बीच मेरे आने से पहले इस सदन में क्या बातें हुईं, पर मैं समझता हूं कि जैसा कि स्थानीय स्वशासन के माननीय मंत्री ने संशोधन का प्रारूप तैयार किया है, उस पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। अगर वह वैसा ही रहे, जिस रूप में उन्होंने संशोधन पेश किया है, तो विपक्ष उसे सहर्ष स्वीकार कर लेगा।

महोदय! अगर यही स्थिति है, तो मेरी समझ में नहीं आता कि मेरे माननीय मित्र श्री मिट्ठा द्वारा प्रस्तावित संशोधन को स्वीकार करने में विपक्ष के माननीय सदस्यों को क्या कठिनाई है। महोदय! जैसा मैं मंत्री महोदय और अपने मित्र श्री मिट्ठा की स्थिति को समझता हूं, दोनों के बीच मुझे बहुत ही मामूली अंतर दिखाई देता है। स्थानीय स्वशासन के माननीय मंत्री ने अपने संशोधन को बहुत मोटे तौर पर प्रस्तुत किया है। वह अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों की ग्राम पीठ पर नियुक्ति की व्यवस्था और इस सदन में निर्णय लेने का दायित्व कलक्टर को सौंपना चाहते हैं। यह भारी दायित्व उन्होंने अल्पसंख्यकों के नाम मोटे तौर पर व्यक्त किया है, चाहे वे कोई भी हों। मेरे माननीय मित्र श्री मिट्ठा एक कदम आगे बढ़ गए हैं और उन्होंने कहा है कि ऐसा करतें समय कलक्टर को विशेष रूप से मुसलमान व दलित वर्गों को ध्यान में रखना चाहिए। महोदय! मेरी समझ में नहीं आता है कि जो माननीय सदस्य संशोधन को मोटे तौर पर स्वीकार करते हैं, उन्हें उसमें विशेष उल्लेख से क्या आपत्ति है। क्या वह मानते हैं, या नहीं कि प्रांतों में अल्पसंख्यक हैं और मंत्री महोदय के प्रावधान इन अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के लिए हैं? अगर अल्पसंख्यक हैं, तो उनका

* बोंबे लेजिस्लेटिव काउंसिल डिबेट्स, खंड 37, पृ. 323-24, 10 फरवरी 1933, माननीय रूस्तमेज वकील ने ग्राम पंचायत अधिनियम की धारा 37 (2) में एक संशोधन पेश किया, जिसमें उन्होंने ग्राम पीठ में अल्पसंख्यक समुदायों के लिए न्यायोचित व उचित प्रतिनिधित्व की मांग की। इस संशोधन में, श्री मोहम्मद सुलेमान कासम मिट्ठा ने एक और संशोधन पेश किया है जो इस प्रकार हैः

‘बशर्ते कि जब ऐसे वर्ग में केवल मुसलमान या दलित वर्गों के सदस्य हों, तब कलक्टर यथा प्रसंग कम से कम मुसलमान या दलित वर्ग का एक सदस्य ग्राम पीठ के सदस्य के रूप में नियुक्त करे।’ डॉ. अम्बेडकर ने श्री मिट्ठा के इस संशोधन का समर्थन किया।