10. छोटे किसान राहत विधेयक - Page 153

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छोटे किसान राहत विधेयक *

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डॉ. भीमराव अम्बेडकर : महोदय! मुझे संदेह है कि आपने मुझे, जो दस मिनट का समय दिया है, क्या मैं इस विधेयक के संबंध में वह सब कुछ जो मैं कहना चाहता हूं, कह पाऊंगा। फिर भी, मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश करूंगा और अपनी बातें बहुत संक्षेप में ही कहूंगा।

इस विधेयक का आशय उन दो समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करना है, जो इस प्रेसिडेंसी के किसानों को प्रभावित करती हैं। पहली समस्या बिखरे हुए खेतों की है और दूसरी समस्या छोटे खेतों की है। मैं नहीं मानता कि माननीय सदस्य, जिन्होंने मेरे माननीय मित्र, भूमि बंदोबस्त आयुक्त, का भाषण सुना है, इससे इंकार करेंगे कि बिखरे हुए खेत एक बुराई है और इस बुराई को जहां तक संभव हो, दूर करना चाहिए। मैं उनसे सहमत हूं कि बिखरे हुए खेतों के होने से बहुत अधिक परेशानियां हैं और जहां तक विधेयक का उससे संबंध है, मैं इससे सहमत हूं कि इनकी चकबंदी होनी चाहिए। छोटे खेतों के प्रश्न पर मैं अवश्य कहूंगा कि मैं विधेयक प्रस्तुत करने वाले माननीय सदस्य से इस बात पर असहमत हूं कि छोटे खेत लाभदायक नहीं हैं। महोदय, माननीय सदस्य श्री एंडरसन ने हमें आंकड़ों से बोझिल कर दिया है, जो यह बताते हैं कि वर्तमान खेत कितने छोटे हैं और उन खेतों के छोटे होने से कितनी कठिनाइयां होती हैं। मैं यह स्वीकार करता हूं कि छोटे खेतों के होने से कठिनाइयां हैं, लेकिन मैं यह नहीं मानता कि छोटे खेत निश्चित रूप से अलाभकारी या अनुत्पादक हैं। जिस तरह से अनुत्पादकता शब्द का प्रयोग विधेयक प्रस्तुत करने वाले माननीय सदस्य या बंदोबस्त आयुक्त द्वारा किया गया है, इसका अर्थ मेरी समझ में नहीं आता है। महोदय! जैसा कि मैं इस शब्द को समझता हूं, मैं कहना चाहता हूं कि खेत का उत्पादक होना या अनुत्पादक होना अनिवार्य रूप से आकार पर निर्भर नहीं करता, जिसे हम अर्थशास्त्र में उत्पादन के अन्य कारक कहते हैं, यह उस पर निर्भर करता है या वास्तव में उसके साथ ही बदलता है। यह श्रम के साथ बदलता है। वह पूंजी के साथ बदलता है। उदाहरण के लिए यदि