10. छोटे किसान राहत विधेयक - Page 154

छोटे किसान राहत विधेयक

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एक किसान के पास अधिक श्रम लगाने के साधन हैं और उसके पास विनियोग करने के लिए कोई बड़ी पूंजी नहीं है, तो मेरा निवेदन है कि उस आधार पर यदि यह खेत छोटा है तो भी उसे अनुत्पादक कहना उचित नहीं है। मेरा यह दृष्टिकोण होने के कारण, महोदय! मैं विधेयक प्रस्तुत करने वाले सदस्य से और भूमि बंदोबस्त आयुक्त से यह सुनना चाहता था कि हमारे देश में पूंजी का बाहुल्य है और बेहद कुशल उत्पादन के लिए हमारे पास बहुत अधिक कृषि उपकरण हैं। अगर उन्होंने यह बताया होता तो हम उनसे सहमत हो सकते थे कि छोटे खेतों से उत्पादन अलाभकारी हो सकता है, क्योंकि उनमें हमारे पास जो उपकरण हैं, उनका उपयोग नहीं हो सकता। लेकिन, महोदय! मैं यह जरूर स्वीकार करता हूं कि माननीय सदस्य, भूमि बंदोबस्त आयुक्त, ने इस मुद्दे को पूरा ही छोड़ दिया है। मैं उनसे यह सुनना चाहता था कि किसानों के पास काफी अधिक पूंजी के साथ अधिक संख्या में हल एवं पशु हैं और वे उनका इस्तेमाल इसलिए नहीं कर पाते हैं, क्योंकि उनके खेत बहुत छोटे हैं। जहां तक मैं इस समस्या को समझ पाया हूं, मैं पाता हूं कि बजाए इसके कि किसान के कार्य के लिए उपलब्ध पूंजी बहुत अधिक है और वह बर्बाद हो रही है, क्योंकि उसके खेत छोटे हैं, स्थिति उसके विपरीत है, जैसा कि हमें बताया गया है। महोदय! उदाहरण के लिए मैं पाता हूं कि मद्रास प्रेसिडेंसी में तीन एकड़ जमीन पर एक हल है। बंबई प्रेसिडेंसी में छह एकड़ के लिए एक हल है। पंजाब में प्रत्येक दो एकड़ के लिए एक हल है। मैं यह विवरण सरकारी आंकड़ों से पढ़ रहा हूं। ये किसानों के पूंजी उपकरण से संबंधित आंकड़े हैं और यदि स्थिति को मेरे अनुसार देखा जाए, तो खेत का उत्पादक या अनुत्पादक होना उसके आकार पर नहीं, बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि किसान के पास खेत के आकार के अनुरूप पूंजी है कि नहीं। इसलिए मेरा मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में खेतों को और छोटा कर दिया जाए। मेरा यह तर्कसंगत मत है और मैं इसका सामना करने से नहीं डरता। इसलिए मेरी समझ में नहीं आता है कि खेतों को बड़ा करने की क्या उपयोगिता है, यदि उदाहरण के लिए किसान के पास जमीन पर खेती करने के लिए साधन नहीं हैं। मेरी समझ में नहीं आता है कि खेतों के क्षेत्र में की गई बढ़ोतरी किसान की पैदावार को कैसे बढ़ाएगी, जबकि उसके पास जमीन पर

खेती करने के लिए आवश्यक श्रम और पूंजी नहीं है।

फिर, हमें यह तथ्य भी याद रखना होगा कि हमारा देश कृषि प्रधान देश है और हमारी जमीन ऊसर हो चुकी है। हम हजारों वर्षों से इस पर खेती कर रहे हैं और चाहे हम जो भी प्रयास कर लें, हम अपनी जमीन की उत्पादकता को उस स्तर तक, उदाहरण के लिए अमरीका की जमीन के स्तर तक जहां की जमीन अभी जोती भी नहीं गई, नहीं ले जा सकते। हमें इस तथ्य को भी ध्यान में रखना चाहिए। ऐसा होने

* द बोंबे गवर्नमेंट गजट, भाग 5, पृ. 64-65, 12 जुलाई 1928