138 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
के कारण, महोदय! समस्या का समाधान खेतों का आकार बढ़ाने से नहीं हो सकता, बल्कि सघन खेती से हो सकता है, अर्थात् जिस तरह के हमारे खेत हैं, उनमें ज्यादा पूंजी और ज्यादा श्रम लगाकर। इसलिए मैं सोचता हूं कि विधेयक का वह हिस्सा जो खेतों का आकार बढ़ाने के संबंध में है, पूरी तरह अनावश्यक है। लेकिन यह मानते हुए कि हम अपनी कृषि भूमि की चकबंदी करें और अपने खेतों का आकार बड़ा करें, मैं सोचता हूं कि इस विधेयक द्वारा प्रस्तावित इस्तेमाल होने वाले तरीकों की, जितनी सावधानी विधेयक प्रस्तुत करने वाले ने दिखाई है, उससे कहीं ज्यादा सावधानी से जांच करनी चाहिए। महोदय! अब जो तरीके इस विधेयक में मुख्यतया इस्तेमाल किए गए हैं वे हैं, पहला, अचल संपत्ति के बंटवारे पर नियंत्रण और दूसरा, चकों की बिक्री। अब मैं मानता हूं कि इस मुद्दे पर कोई विवाद नहीं हो सकता है कि यदि ये दो तरीके अपनाए जाते हैं, तो हमारी कृषि पर आधारित जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा भूमिहीन हो जाएगा और यह देश के सर्वाधिक हित में नहीं है कि गरीब तबकों को इस ढंग से और गरीब कर दिया जाए। महोदय! मैं यह बताना चाहता हूं कि यद्यपि हिन्दू कानून कई तरह से बहुत त्रुटिपूर्ण है, तथापि उत्तराधिकार का हिन्दू कानून लोगों का बहुत बड़ा रक्षक रहा है। हिन्दू धर्म द्वारा स्थापित सामाजिक और धार्मिक एकछत्रवाद ने लोगों के एक बहुत बड़े वर्ग को निरंतर दासता में जकड़े रखा है। यदि इस दासता में भी उनकी दशा सहनीय है तो इस कारण से कि उत्तराधिकार के हिन्दू कानून ने कुबेरपतियों के निर्माण को रोका है। महोदय! हम सामाजिक दासता से आर्थिक गुलामी को जोड़ना नहीं चाहते। यदि आदमी सामाजिक रूप से स्वतंत्र नहीं हैं, तो उसे आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने दीजिए। इसलिए मैं उस न्यायपूर्ण और उत्तराधिकार की समतामूलक व्यवस्था को समाप्त करने के पूर्णतया खिलाफ हूं। इस समय विधेयक प्रस्तुत करने वाले माननीय सदस्य को मैं एक विनम्र सुझाव देना चाहूंगा। मैं विधेयक के प्रथम वाचन पर इस शर्त पर अपना समर्थन देने के लिए तैयार हूं, यदि वह विधेयक में पेश किए गए जमीन की चकबंदी और अभिवर्धन के तरीकों पर न अड़े रहें। महोदय! मेरा विचार है कि बेहतर तरीका यह होगा कि सामान्य क्षेत्रों के लिए सहकारी कृषि अपनाई जाए और उसमें स्थित छोटी जोतों के मालिकों को, बिना उनके निजी स्वामित्व को समाप्त किए खेती में शामिल होने के लिए विवश किया जाए। अगर ऐसा किया जाता है, और इस विधेयक में इसके लिए कोई प्रावधान किया जाता है, तो मैं इस विधेयक का निश्चय ही समर्थन करूंगा। (श्री एफ.जी.एच. एंडरसन ने असहमति जताई)। माननीय सदस्य श्री एंडरसन, बंदोबस्त आयुक्त, अपना सिर हिला रहे हैं। लेकिन मैं माननीय सदस्य को कह सकता हूं कि जो तरीका मैं सुझा रहा हूं, वह मेरा अपना नहीं है, बल्कि यह व्यवस्था इटली और फ्रांस में प्रचलित है और इंग्लैंड के कुछ हिस्सों में इसको अपनाना अत्यधिक फायदेमंद रहा है। मैं इस संबंध में सदन के माननीय नेता को निश्चय ही सुझाव दूंगा कि वह श्री ओटा राथफेल्ड ने अपनी पुस्तक इंप्रेशन ऑफ दि को - ऑपरेटिव