10. छोटे किसान राहत विधेयक - Page 156

छोटे किसान राहत विधेयक

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मूवमेंट इन फ्रांस एंड इटली में जो विचार व्यक्त किए हैं, उस पर ध्यान पूर्वक मनन करें। मैं उक्त पुस्तक का एक पैरा यहां उद्धृत कर रहा हूं :

समग्र रूप से यह आंदोलन बहुत बड़ी क्षमता रखता है। यह युद्ध के समय से

ही फ्रांस में अपनाया गया है, और इससे अच्छे परिणाम प्राप्त हुए हैं। रोमानिया

में इस प्रकार की सहकारिता देश की कृषि में क्रांति पैदा कर रही है। यह

संभव है कि सामान्य रूप से सहकारी खेती से दक्कन की गरीबी से पीडि़त

अविकसित खेती की उन समस्याओं का जो अनुत्पादक भूमि और संपत्ति के

अत्यधिक उपख्ांडन पर केंद्रित हैं, कोई समाधान खोज निकाला जाए।

इस प्रकार के समाधान से उत्तराधिकार की परंपरा में क्रांतिकारी हस्तक्षेप नहीं हो पाएगा, जिसकी वकालत गैर-किसान वर्ग के भटके हुए सुधारक अक्सर करते हैं और ऐसा करने से, जो परिणाम आएंगे, वे परिवार परिसीमन में बाधा नहीं डालेंगे, लेकिन ऐसा होने का डर है, अगर नई पीढ़ी को कानूनी हस्तक्षेप से संपत्ति से वंचित किया जाता है।

महोदय! हम देखते हैं कि इस प्रकार की व्यवस्था सफलता के साथ अन्यत्र आजमाई गई है। मैं यह कहते हुए अपना वक्तव्य समाप्त करूंगा कि यदि सदन के माननीय नेता इन सब सुझावों पर ध्यानपूर्वक विचार करते हैं और प्रवर समिति में सिद्धांत के आधार पर सुझाए गए किसी संशोधन पर एतराज नहीं करते हैं तथा विधेयक में प्रस्तावित भू-संपत्ति की चकबंदी और विस्तारीकरण पर अड़े नहीं रहते हैं, तो मुझे विधेयक के प्रथम वाचन का समर्थन करने में कोई आपत्ति नहीं है।

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II*

(असहमति का ब्यौरा)

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बंबई के गवर्नर की परिषद की कार्यवाही बंबई के गवर्नर की विधान

परिषद के सचिव द्वारा विधान परिषद कार्यालय परिषद हाल, पूना,

10 जुलाई 1928

सं. 894 — बोंबे गवर्नमेंट गजट, भाग 5, पृ. 34-39

जून 1928 में प्रकाशित 1927 के विधेयक संख्या 16 (कृषि भूमि के अत्यधिक विभाजन को रोकने और ऐसी भूमि की चकबंदी को बढ़ाने वाले कानून) से संबंधित प्रवर समिति की रिपोर्ट पर दी गई पाद टिप्पणी का उल्लेख करते हुए यह सूचित किया जाता है कि विधायक डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने प्रवर समिति की रिपोर्ट पर नीचे दिखाए गए असहमति के ब्यौरे के साथ दस्तखत किया हैः

* बोंबे लेजिस्लेटिव असेम्बली डिबेट्स, खंड 2, पृ. 617-19, 24 जनवरी 1938