10. छोटे किसान राहत विधेयक - Page 157

140 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

(विधायक डॉ. भीमराव अम्बेडकर की असहमति का ब्यौरा)

  1. इस विधेयक का भाग 1 इस धारणा के साथ शुरू होता है कि लाभकारी

खेती के लिए आज हमारे पास जो खेत हैं, उनसे बड़े खेतों की हमें आवश्यकता है। मैं इस धारणा से बिल्कुल भी सहमत नहीं हूं। लेकिन यह मानते हुए कि यह धारणा सही है, जिस मुख्य प्रश्न के बारे में हर व्यक्ति को खुद को इस भाग पर सहमति जताने से पूर्व संतुष्ट करना होगा, वह यह है कि ‘क्या यह विधेयक मौजूदा छोटे

खेतों से बड़े खेतों को बनाने की समस्या को इस प्रकार सुलझा पाएगा कि इस पर कोई गंभीर आपत्ति नहीं उठे?’

  1. मानक इकाई जो एक बार निश्चित की गई है, उसको बरकरार रखने के लिए विधेयक में दो क्रियाविधि अपनाई गई हैं। पहली मानक खेतों से छोटे खेतों के मालिकों को कड़ा दंड देती है, ताकि उसके लिए छोटे खेत का स्वामित्व लाभ के बजाए, बोझ बन जाए। दूसरी छोटे खेत के स्वामित्व पर रोक लगाती है और इसमें व्यवस्था की गई है कि भविष्य में छोटे खेत अस्तित्व में ही न आएं। दूसरी क्रियाविधि के उदाहरण के रूप में बंटवारे पर लगी रोक का उल्लेख किया जा सकता है। इसलिए यह स्पष्ट है कि विधेयक द्वारा अपनाई गई क्रियाविधि से लोगों के स्वामित्व का अधिकार खतरे में पड़ जाता है।

  2. मैं इस क्रियाविधि पर तीन कारणों से एतराज करता हूं। पहला, यह संपत्ति के अधिकार को आंच पहुंचाता है। अगर व्यवस्था राज्य के स्वामित्व और भूमि के प्रबंध की होती, तो संपत्ति के अधिकार पर चोट करना इतना गंभीर चिंता का विषय नहीं बनता। लेकिन व्यवस्था ऐसी है कि दूसरों की कीमत पर कुछ भू-स्वामियों की समृद्धि होगी। मेरे दिमाग में इसे लेकर कोई शंका नहीं है कि इस विधेयक में अपनाई गई क्रियाविधि कुछ भू-स्वामियों को भूमिहीन मजदूरों में बदल देगी। कुल कितने लोगों की इससे दुर्दशा होगी, इसकी कल्पना करना कठिन है। हर चीज इस पर निर्भर हो जाएगी कि मानक खेत कितने बड़े होते हैं। अगर वास्तविक खेत से मानक खेत बहुत अधिक बड़ा हुआ, तो यह एक बहुत बड़े वर्ग पर प्रभाव डालेगा, बजाए इसके कि मानक खेत वास्तविक खेत के लगभग बराबर हो। विस्थापन की विशालता अज्ञात है और उसे तभी जाना जा सकेगा, जब मानक परिभाषित हो जाएगा। पर चूंकि बहुसंख्य किसान छोटे खेतों के मालिक हैं, इसलिए आशंका व्यापक है। मुख्यतः इसी डर से विधेयक के प्रति विरोध उत्पन्न होता है और मैं यह मानने के लिए तैयार नहीं हूं कि यह विरोध निरर्थक है। मैं समाज के आर्थिक आधार में इस प्रकार के आमूल परिवर्तन की संभावना को शांत भाव से नहीं देख सकता।

  3. विधेयक की क्रियाविधि के संबंध में मेरी दूसरी आपत्ति यह है कि वह निष्पक्ष होगा और मोटे तौर पर स्थिति वही बनी रहेगी। छोटे खेत के पड़ोसी खेत-मालिकों को पूर्वक्रम का अधिकार दिया है, जिसका उद्देश्य सटे हुए छोटे खेतों का समूह