142 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
विधेयक के खंड 21 से बैठती है, उल्लेख बताएगा कि जब तक नए टुकड़े को सटे हुए खेत से जोड़ नहीं दिया जाए, इस पर कोई खेती नहीं हो पाएगी। मेरा निवेदन है कि यह और कुछ नहीं, केवल सहकारी योजना है, जिसका सुझाव मैंने ऊपर दिया है। मेरे और प्रवर समिति के बीच अंतर केवल यह है कि यह सहकारी योजना को नए टुकड़ों तक सीमित कर देता है, जबकि मेरा प्रस्ताव इसे सभी टुकड़ों पर लागू करने का है। दोनों में मैं समझता हूं कि मैं ही सही हूं, जब मैं यह कहता हूं कि प्रवर समिति को प्रमाणित करना होगा कि यह योजना क्यों एक के लिए ठीक है और दूसरे के लिए नहीं। मेरे पास नए और पुराने टुकड़ों के बीच के भेदभाव को प्रमाणित करने के लिए कोई दलील नहीं है।
- ऊपर बताए गए कारणों के आधार पर मैं विधेयक के भाग 1 का समर्थन नहीं कर सकता, हालांकि मैं इसके लक्ष्यों एवं प्रयोजनों के विरुद्ध नहीं हूं। इसके भाग 2 के संबंध में, मुझे कोई आपत्ति नहीं हैं, जो अब केवल चकबंदी तक सीमित है। फिर भी, मैं यह कहता हूं कि मेरी योजना के तहत चकबंदी के लिए अलग प्रावधान अनावश्यक होगा। सहकारी खेत बड़ी और चकबंद भू-संपत्ति, दोनों ही होगा।
III*
डॉ. भीमराव अम्बेडकर (बंबई नगर) : महोदय! चूंकि मैं नियम 19 को समझने में कुछ कठिनाई अनुभव कर रहा हूं, अतः एक प्रश्न पूछना चाहता हूं। निस्संदेह यह वह मसला है, जिसमें पहली बार अध्यक्ष द्वारा तय किया जाएगा कि क्या एक
खास संशोधन या एक खास विधेयक को पूर्व अनुमोदन की जरूरत है। खंड (2) के अनुसार अध्यक्ष के विचार में मसले को पूर्व अनुमोदन की जरूरत है, तो अध्यक्ष सूचना प्राप्ति के बाद जितनी जल्दी हो सके विधेयक या संशोधन को गवर्नर के पास भेजेगा और अधिसूचना को कार्यवाही की सूची में तब तक नहीं रखा जाएगा, जब तक कि गवर्नर द्वारा अध्यक्ष को यह संकेत नहीं दिया जाता है कि पूर्वाभिष्ट अनुमोदन की अनुमति दी गई है। खंड (3) सुविचारित रूप से कहता है :
कोई विधेयक या संशोधन विधेयक या संशोधन है या नहीं, अगर ऐसा कोई
विवाद उठता है जिसको बिना पूर्व अनुमोदन के लाया नहीं जा सकता, तो
इस विवाद को उस अधिकारी के पास भेजना होगा, जिसको जरूरत पड़ने पर
पूर्व अनुमोदन की अनुमति देने का अधिकार है और इस अधिकारी का निर्णय
अंतिम होगा।
खंड (2) में जिस विवाद के उठने की अपेक्षा की जाती है, वह अध्यक्ष और उस सदस्य के बीच है, जिसने संशोधन या विधेयक की सूचना दी है। अगर वह सदस्य जिसने संशोधन या विधेयक की सूचना दी है, यह महसूस करता है कि उसके विधेयक
* बोंबे लेजिस्लेटिव असेम्बली डिबेट्स, खंड 3, पृ. 24-25, 27 अप्रैल 1938