11. बंबई पुलिस अधिनियम-संशोधन विधेयक - Page 166

बंबई पुलिस अधिनियम-संशोधन विधेयक

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अब समय आ गया है कि जब कुछ उपाय किए जाने चाहिएं, ताकि प्रेसिडेंसी के अधिकारी तत्परता और प्रभावशाली ढंग से इस खतरे से निपट सकें।

इस संशोधन की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए जिस बात पर मैं सदन का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं, वह यह है कि मेरे संशोधन की धारा (3) पुलिस आयुक्त को किसी भी व्यक्ति को बंबई प्रेसिडेंसी की सीमा से निष्कासित करने का अधिकार देती है, यदि पुलिस आयुक्त के पास ऐसा विश्वास करने के पर्याप्त कारण हों कि अमुक व्यक्ति इस तरह से काम कर रहा है कि उसकी उपस्थिति या गतिविधियां या उसके कारनामे दंगों के लिए जिम्मेदार हैं। यही इस विधेयक का प्रमुख उद्देश्य है। मैं पूर्णतः सहमत हूं कि इस विधेयक की यह धारा अमुक व्यक्ति पर प्रतिबंध लगाती है। महोदय! लेकिन मैं यह कह सकता हूं कि मैं इस वर्ग से आता हूं, जिसे समाज के किसी अन्य वर्ग से ज्यादा स्वतंत्रता की जरूरत है। मैं पेशे से वकील हूं और मैं स्वतंत्रता का महत्त्व समझता हूं। लेकिन मैं जिस वर्ग से आता हूं, उसके हितों की दृष्टि से स्वतंत्रता की तमाम अभिलाषाओं और इस तथ्य के कारण भी कि मैं पेशे से वकील हूं, मुझे यह कहना पड़ रहा है कि ऐसे अवसर भी आते हैं, जब समाज के अधिसंख्य लोगों की स्वतंत्रता की रक्षा करने के साथ, समाज के गुंडों और अपराधी तत्त्वों की स्वतंत्रता को निलंबित किया जा सकता है। मुझे इस संबंध में कोई आपत्ति नहीं है। इसलिए जिस एक बात से मैं चिंतित हूं और जिससे सदन के सदस्यों को भी चिंतित होना चाहिए, वह यह है कि क्या ऐसे रक्षोपाय किए गए हैं, ताकि पुलिस आयुक्त को, जो हम स्वैच्छिक अधिकार दे रहे हैं, उसका दुरुपयोग नहीं किया जाएगा। यही एक मात्र प्रश्न है जिसके प्रति इस सदन को, अवसर की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, चिंतित होना चाहिए।

महोदय! अब सदन से मेरा निवेदन है कि इस संशोधन में रक्षोपायों के पर्याप्त प्रावधान हैं। इसलिए मैं संक्षेप में उन रक्षोपायों का उल्लेख करूंगा। पहला उपाय यह है कि इस संशोधन के तहत पुलिस आयुक्त व्यावहारिक रूप में विधायिका या जनता की जानकारी के बिना अपने स्वैच्छिक अधिकारों का उपयोग कभी नहीं कर सकता है। माननीय सदस्य देखेंगे कि वह कभी ऐसा इसलिए नहीं कर सकता, क्योंकि आपाताकल की घोषणा जारी होने के बाद ही पुलिस आयुक्त को यह अधिकार दिया जाएगा। आपातकाल की घोषणा जारी होने से पहले पुलिस आयुक्त इस अधिकार का उपयोग नहीं कर सकेगा। यही एक बात है जिसे इस संशोधन में दिए गए प्रावधान के संबंध में हमें ध्यान में रखनी है। यह अधिकार आपातकाल की घोषणा होने के बाद ही प्रभावी होंगे और इसमें विधायिका के दृष्टिकोण से भी एक निश्चित फायदा है। वह यह है कि अगर बिना किसी कानून के सरकार आपातकाल की घोषणा करती है, तो इस सदन को स्थगन प्रस्ताव लाने का और गलत ढंग से आपातकाल की घोषणा करने के लिए सरकार की निंदा करने का मौका रहेगा। मेरा निवेदन है कि यह एक नियंत्रण है जो यह संशोधन विधायिका को यह देखने