बंबई पुलिस अधिनियम-संशोधन विधेयक
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समर्थन नहीं कर सकता कि इस शब्द को निकाल दिया जाए। ‘उपस्थित’ शब्द जरूर रहना चाहिए। मैं एक उदाहरण दूंगा। एक साधु बंबई आता है। वह किसी समुदाय में स्वीकार्य है, किसी दूसरे समुदाय में स्वीकार्य नहीं है। एक फकीर बंबई आता है, समाज का एक वर्ग उसका आदर करता है, दूसरा वर्ग उसे अस्वीकार करता है। इसी मुद्दे पर सांप्रदायिक दंगा शुरू होता है। क्या यह आवश्यक नहीं होगा कि दंगों को कुचलने के लिए बंबई नगर में इस आदमी को उपस्थित ही न रहने दिया जाए। निस्संदेह यह एक अतिरंजित उदाहरण हो सकता है, किंतु एक अतिरंजित उदाहरण ही हमारे द्वारा दिए गए किसी अधिकार की वैधता और प्रभाव को जांचने का एकमात्र तरीका है। इसलिए मैं निवेदन करता हूं ‘उपस्थित’ शब्द जरूरी है और इसे विधेयक में बना रहना चाहिए।
दूसरे संशोधन के संबंध में मेरे विचार सुस्पष्ट हैं, क्योंकि हमारा इरादा यह है कि विधेयक सांप्रदायिक दंगों के अलावा अन्य किन्हीं दंगों पर लागू न हो। इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपना संशोधन प्रस्तुत करता हूं और मुझे उम्मीद है कि सदन इसे स्वीकार करेगा।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर * (बंबई नगर) : महोदय! मैं यह जानकर बहुत खुश हूं कि जो संशोधन मैंने पेश किया था, उसे कई माननीय सदस्यों का समर्थन मिला है जिन्होंने विधेयक के पहले वाचन पर वक्तव्य दिया था। मैं नहीं समझता कि विपक्ष के माननीय नेता ने मेरे संशोधन का विरोध किया है, यद्यपि उन्हें विधेयक के संबंध में बहुत कुछ कहना था। मेरे माननीय मित्र, राव बहादुर चितले ने संशोधन का समर्थन किया है और मेरे मित्र जमनादास मेहता का विरोध, यदि मुझे ऐसा कहने की अनुमति हो, तो मौलिक नहीं है, बल्कि रणनीतिगत है। इस दृष्टि से मेरे लिए यह जरूरी नहीं है कि उन टिप्पणियों पर वास्तव में लंबे उत्तर दिए जाएं। लेकिन दो बातें हैं, जिनका मैं उल्लेख करना चाहता हूं। निस्संदेह यह एक आपातकालीन उपाय है और आपातकालीन उपाय के रूप में, इसमें व्यक्ति की स्वतंत्रता पर पर्याप्त प्रतिबंध लगाए गए हैं।
माननीय अली मोहम्मद खान देहलवी : मैं माननीय सदस्य की बात में संशोधन करना चाहता हूं। मैं नहीं जानता कि माननीय सदस्य को यह कहने का क्या अधिकार है कि यह एक आपातकालीन उपाय है, जिसे माननीय प्रस्तावक स्वीकार नहीं करते।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर : मैं केवल अपने संशोधन के संबंध में जवाब दे रहा हूं। मेरा संशोधन एक आपातकालीन संशोधन है और जैसा कि मैंने अपने वक्तव्य में स्वीकार किया है, इसमें व्यक्ति पर प्रतिबंध शामिल है। मैं इस संबंध में निवेदन करना चाहता हूं कि अगर वे भद्र पुरुष जिन्होंने मेरे संशोधन के संबंध में वक्तव्य दिया है, इस तथ्य को बढ़ा-चढ़ाकर और इस पर जोर देते हुए कि इसमें प्रतिबंध